शिक्षा संसाधन - भगत रविदास

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भगत रविदास सबद (२१ - ४०)

भगत रविदास – सबद २१

हम सरि दीनु दइआलु न तुम सरि अब पतीआरु किआ कीजै ॥

रागु धनासरी, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९४

भगत रविदास – सबद २२

चित सिमरनु करउ नैन अविलोकनो स्रवन बानी सुजसु पूरि राखउ ॥

रागु धनासरी, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९४

भगत रविदास – सबद २३

नामु तेरो आरती मजनु मुरारे ॥

रागु धनासरी, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९४

भगत रविदास – सबद २४

नाथ कछूअ न जानउ ॥

रागु जैतसरी, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ७१०

भगत रविदास – सबद २५

सह की सार सुहागनि जानै ॥

रागु सूही, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९३

भगत रविदास – सबद २६

जो दिन आवहि सो दिन जाही ॥

रागु सूही, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९३

भगत रविदास – सबद २७

ऊचे मंदर साल रसोई ॥

रागु सूही, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९४

भगत रविदास – सबद २८

दारिदु देखि सभ को हसै ऐसी दसा हमारी ॥

रागु बिलावलु, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ८५८

भगत रविदास – सबद २९

जिह कुल साधु बैसनौ होइ ॥

रागु बिलावलु, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ८५८

भगत रविदास – सबद ३०

मुकंद मुकंद जपहु संसार ॥

रागु गोंड, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७५

भगत रविदास – सबद ३१

जे ओहु अठसठि तीरथ न्नावै ॥

रागु गोंड, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७५

भगत रविदास – सबद ३२

पड़ीऐ गुनीऐ नामु सभु सुनीऐ अनभउ भाउ न दरसै ॥

रागु रामकली, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ९७३

भगत रविदास – सबद ३३

ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै ॥

रागु मारू, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०६

भगत रविदास – सबद ३४

सुख सागर सुरितरु चिंतामनि कामधेन बसि जा के रे ॥

रागु मारू, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०६

भगत रविदास – सबद ३५

खटु करम कुल संजुगतु है हरि भगति हिरदै नाहि ॥

रागु केदारा, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२४

भगत रविदास – सबद ३६

बिनु देखे उपजै नही आसा ॥

रागु भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६७

भगत रविदास – सबद ३७

तुझहि सुझंता कछू नाहि ॥

रागु बसंतु, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९६

भगत रविदास – सबद ३८

नागर जनाँ मेरी जाति बिखिआत चंमारं ॥

रागु मलार, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९३

भगत रविदास – सबद ३९

हरि जपत तेऊ जना पदम कवलास पति तास सम तुलि नही आन कोऊ ॥

रागु मलार, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९३

भगत रविदास – सबद ४०

मिलत पिआरो प्रान नाथु कवन भगति ते ॥

रागु मलार, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९३