भगत रविदास की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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ਪੰਜਾਬੀ
दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ २
भगत रविदास सबद (२१ - ४०)
भगत रविदास – सबद २१
हम सरि दीनु दइआलु न तुम सरि अब पतीआरु किआ कीजै ॥
रागु धनासरी, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९४
भगत रविदास – सबद २२
चित सिमरनु करउ नैन अविलोकनो स्रवन बानी सुजसु पूरि राखउ ॥
भगत रविदास – सबद २३
नामु तेरो आरती मजनु मुरारे ॥
भगत रविदास – सबद २४
नाथ कछूअ न जानउ ॥
रागु जैतसरी, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ७१०
भगत रविदास – सबद २५
सह की सार सुहागनि जानै ॥
रागु सूही, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९३
भगत रविदास – सबद २६
जो दिन आवहि सो दिन जाही ॥
भगत रविदास – सबद २७
ऊचे मंदर साल रसोई ॥
रागु सूही, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९४
भगत रविदास – सबद २८
दारिदु देखि सभ को हसै ऐसी दसा हमारी ॥
रागु बिलावलु, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ८५८
भगत रविदास – सबद २९
जिह कुल साधु बैसनौ होइ ॥
भगत रविदास – सबद ३०
मुकंद मुकंद जपहु संसार ॥
रागु गोंड, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७५
भगत रविदास – सबद ३१
जे ओहु अठसठि तीरथ न्नावै ॥
भगत रविदास – सबद ३२
पड़ीऐ गुनीऐ नामु सभु सुनीऐ अनभउ भाउ न दरसै ॥
रागु रामकली, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ९७३
भगत रविदास – सबद ३३
ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै ॥
रागु मारू, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०६
भगत रविदास – सबद ३४
सुख सागर सुरितरु चिंतामनि कामधेन बसि जा के रे ॥
भगत रविदास – सबद ३५
खटु करम कुल संजुगतु है हरि भगति हिरदै नाहि ॥
रागु केदारा, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२४
भगत रविदास – सबद ३६
बिनु देखे उपजै नही आसा ॥
रागु भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६७
भगत रविदास – सबद ३७
तुझहि सुझंता कछू नाहि ॥
रागु बसंतु, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९६
भगत रविदास – सबद ३८
नागर जनाँ मेरी जाति बिखिआत चंमारं ॥
रागु मलार, भगत रविदास, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९३
भगत रविदास – सबद ३९
हरि जपत तेऊ जना पदम कवलास पति तास सम तुलि नही आन कोऊ ॥
भगत रविदास – सबद ४०
मिलत पिआरो प्रान नाथु कवन भगति ते ॥
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