भगत बेणी का जीवन और रूपक संदेश।

भगत बेणी के जन्म के समय और स्थान के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। उनकी वाणी से उनके स्वभाव का अंदाज़ा होता है। वह शांत मन वाले फ़ाज़िल थे जो रूहानी समझ के आरज़ूमंद थे।

 

भगत बेणी का रूहानी संदेश गुरु ग्रंथ साहिब में उनके ३ सबदों में दर्ज है।

भगत बेणी की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

निर्धारित संगीत-शास्त्र में सभी सबद अब उपलब्ध हैं।

सबदों की रूपक व्याख्याएँ दिसंबर २०२७ तक प्रकाशित होती रहेंगी।

भगत बेणी – सबद १

रे नर गरभ कुंडल जब आछत उरध धिआन लिव लागा ॥

रागु सिरीरागु, भगत बेणी, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३

भगत बेणी – सबद २

इड़ा पिंगुला अउर सुखमना तीनि बसहि इक ठाई ॥

रागु रामकली, भगत बेणी, गुरु ग्रंथ साहिब, ९७४

भगत बेणी – सबद ३

तनि चंदनु मसतकि पाती ॥

रागु प्रभाती, भगत बेणी, गुरु ग्रंथ साहिब, १३५१