भगत सैन का जीवन और रूपक संदेश।

भगत सैन का जन्म १३९॰ ईस्वी में पंजाब के सोहल ठठ्ठी गांव में एक हजाम परिवार में हुआ था जिसे निचली जाति माना जाता है। उनके पिता का नाम मुखंद राय और माता का नाम जीवने था। उन्होंने रहीम ख़ान के शिष्य बन कर उनसे हिकमत सीखी जिसमें स्थानीय जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से इलाज किया जाता था। रोज़ी कमाने के लिये वह बंधावगढ़ चले गये और हजाम और मालशिये के तौर पर काम करने लगे। भगत सैन वाराणसी के सफर के दौरान भगत रामानंद के शागिर्द बन गये थे। भगत सैन परोपकारिता की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने लगन से अपने कर्तव्यों का पालन किया और जरूरतमंदों की सेवा की।

 

भगत सैन का रूहानी संदेश गुरु ग्रंथ साहिब में उनके १ सबद में दर्ज है।

भगत सैन की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

निर्धारित संगीत-शास्त्र में सभी सबद अब उपलब्ध हैं।

सबदों की रूपक व्याख्याएँ दिसंबर २०२७ तक प्रकाशित होती रहेंगी।

भगत सैन – सबद १

धूप दीप घ्रित साजि आरती ॥

रागु धनासरी, भगत सैण, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९५