भगत भीखन का जीवन और रूपक संदेश।

भगत भीखन उत्तर प्रदेश के काकोरी गांव के एक सूफी संत थे। उनका जन्म १४८३ ईस्वी में हुआ था। उन्होंने 'भक्ति' और 'सूफ़ी' लहरों के प्रभाव में अर्थहीन कर्मकांडों और प्रथाओं का खंडन किया। भीखन शाह की वाणी विचार करती है कि सिर्फ़ फ़ाज़िल होना नहीं बल्कि तालिब होना मनुष्य के रोगों के ख़िलाफ़ जीवनदायिनी बूटी के रूप में कार्य करता है।

 

भगत भीखन का रूहानी संदेश गुरु ग्रंथ साहिब में उनके २ सबदों में दर्ज है।

भगत भीखन की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

निर्धारित संगीत-शास्त्र में सभी सबद अब उपलब्ध हैं।

सबदों की रूपक व्याख्याएँ दिसंबर २०२७ तक प्रकाशित होती रहेंगी।

भगत भीखन – सबद १

नैनहु नीरु बहै तनु खीना भए केस दुध वानी ॥

रागु सोरठि, भगत भीखन, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५९

भगत भीखन – सबद २

ऐसा नामु रतनु निरमोलकु पुंनि पदार्थु पाइआ ॥

रागु सोरठि, भगत भीखन, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५९