भगत पीपा का जीवन और रूपक संदेश।
भगत पीपा का जन्म १४२५ ईस्वी में राजस्थान के गांव गगरौन में हुआ था। उनके परदादा मालवा के राजा थे।शाही ज़िंदगी की सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हुये भी भगत पीपा के अंदर रूहानी ज्ञान की लालसा थी। वाराणसी यात्रा के दौरान, उन्होंने भगत रामानंद से अनुरोध किया कि वह गुरु के तौर पर उन्हें अपना लें। भगत पीपा ने अपनी शाही रुतबे को त्याग दिया और रूहानियत के मार्ग पर चल पड़े। भगत पीपा ने अपनी ज़िंदग़ी का ज़्यादातर हिस्सा गुजरात के बंदरगाह वाले शहर द्वारका में गुज़ारा। भगत पीपा और उनकी बीवी ने आम लोगों की सेवा के लिये पूरे देश का सफ़र किया और विनम्रता की अनूठी मिसाल कायम की। वे अपने संगीतबद्ध किये भजन गाकर लोगों को नैतिक जीवन वसर करने की प्रेरणा देते हुये जीवन यापन करते थे और अपनी सारी कमाई ज़रुरतमंदों में बांट देते थे।
भगत पीपा का रूहानी संदेश गुरु ग्रंथ साहिब में उनके १ सबद में दर्ज है।
भगत पीपा की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
निर्धारित संगीत-शास्त्र में सभी सबद अब उपलब्ध हैं।
सबदों की रूपक व्याख्याएँ दिसंबर २०२७ तक प्रकाशित होती रहेंगी।


