भगत धन्ना का जीवन और रूपक संदेश।

भगत धन्ना का जन्म राजस्थान के धुनवां कलां में १४१५ ईस्वी में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके मां-बाप बहुत नेकदिल इंसान थे। उनके पिता का नाम रामेश्वर जाट और माता का नाम गंगा बाई था। भगत धन्ना छोटी उम्र में वाराणसी चले गये और भगत रामानंद के शिष्य बन गये। उनके नेक इरादों और अथाह श्रद्धा ने उनको निरंकार ख़ुदाई के दर्शन करवा दिये जिसका निवास कुदरत के हर कण में है।

 

भगत धन्ना का रूहानी संदेश गुरु ग्रंथ साहिब में उनके २ सबदों में दर्ज है।

सबदों की ऑडियो प्लेलिस्ट निर्धारित संगीत-शास्त्र में सुनें।

भगत धन्ना की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

भगत धन्ना – सबद १

भ्रमत फिरत बहु जनम बिलाने तनु मनु धनु नही धीरे ॥

रागु आसा, भगत धना, गुरु ग्रंथ साहिब, ४८७

भगत धन्ना – सबद २

गोपाल तेरा आरता ॥

रागु धनासरी, भगत धना, गुरु ग्रंथ साहिब, ६९५