भगत नामदेव की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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भगत नामदेव सबद (४१ - ६१)

भगत नामदेव – सबद ४१

मै बउरी मेरा रामु भतारु ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६४

भगत नामदेव – सबद ४२

कबहू खीरि खाड घीउ न भावै ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६४

भगत नामदेव – सबद ४३

हसत खेलत तेरे देहुरे आइआ ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६४

भगत नामदेव – सबद ४४

जैसी भूखे प्रीति अनाज ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६४

भगत नामदेव – सबद ४५

घर की नारि तिआगै अंधा ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६४

भगत नामदेव – सबद ४६

संडा मरका जाइ पुकारे ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६५

भगत नामदेव – सबद ४७

सुलतानु पूछै सुनु बे नामा ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६५

भगत नामदेव – सबद ४८

जउ गुरदेउ त मिलै मुरारि ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६६

भगत नामदेव – सबद ४९

आउ कलंदर केसवा ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६७

भगत नामदेव – सबद ५०

साहिबु संकटवै सेवकु भजै ॥

रागु बसंतु, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९५

भगत नामदेव – सबद ५१

लोभ लहरि अति नीझर बाजै ॥

रागु बसंतु, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९६

भगत नामदेव – सबद ५२

सहज अवलि धूड़ि मणी गाडी चालती ॥

रागु बसंतु, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९६

भगत नामदेव – सबद ५३

काएं रे मन बिखिआ बन जाइ ॥

रागु सारंग, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५२

भगत नामदेव – सबद ५४

बदहु की न होड माधउ मो सिउ ॥

रागु सारंग, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५२

भगत नामदेव – सबद ५५

दास अनिंन मेरो निज रूप ॥

रागु सारंग, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५२

भगत नामदेव – सबद ५६

सेवीले गोपाल राइ अकुल निरंजन ॥

रागु मलार, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९२

भगत नामदेव – सबद ५७

मो कउ तूँ न बिसारि तू न बिसारि ॥

रागु मलार, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९२

भगत नामदेव – सबद ५८

ऐसो राम राइ अंतरजामी ॥

रागु कानड़ा, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, १३१८

भगत नामदेव – सबद ५९

मन की बिरथा मनु ही जानै कै बूझल आगै कहीऐ ॥

रागु प्रभाती, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, १३५०

भगत नामदेव – सबद ६०

आदि जुगादि जुगादि जुगो जुगु ता का अंतु न जानिआ ॥

रागु प्रभाती, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, १३५१

भगत नामदेव – सबद ६१

अकुल पुरख इकु चलितु उपाइआ ॥

रागु प्रभाती, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, १३५१