भगत नामदेव की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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भगत नामदेव सबद (२१ - ४०)

भगत नामदेव – सबद २१

हले यारां हले यारां खुसिखबरी ॥

रागु तिलंग, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२७

भगत नामदेव – सबद २२

सफल जनमु मो कउ गुर कीना ॥

रागु बिलावलु, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ८५७

भगत नामदेव – सबद २३

असुमेध जगने ॥

रागु गोंड, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७३

भगत नामदेव – सबद २४

नाद भ्रमे जैसे मिरगाए ॥

रागु गोंड, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७३

भगत नामदेव – सबद २५

मो कउ तारि ले रामा तारि ले ॥

रागु गोंड, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७३

भगत नामदेव – सबद २६

मोहि लागती तालाबेली ॥

रागु गोंड, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७४

भगत नामदेव – सबद २७

हरि हरि करत मिटे सभि भरमा ॥

रागु गोंड, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७४

भगत नामदेव – सबद २८

भैरउ भूत सीतला धावै ॥

रागु गोंड, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७४

भगत नामदेव – सबद २९

आजु नामे बीठलु देखिआ मूरख को समझाऊ रे ॥

रागु बिलावलु गोंड, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७३

भगत नामदेव – सबद ३०

आनीले कागदु काटीले गूडी आकास मधे भरमीअले ॥

रागु रामकली, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ९७२

भगत नामदेव – सबद ३१

बेद पुरान सासत्र आनंता गीत कबित न गावउगो ॥

रागु रामकली, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ९७२

भगत नामदेव – सबद

माइ न होती बापु न होता करमु न होती काइआ ॥

रागु रामकली, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ९७३

भगत नामदेव – सबद ३३

बानारसी तपु करै उलटि तीरथ मरै अगनि दहै काइआ कलपु कीजै ॥

रागु रामकली, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ९७३

भगत नामदेव – सबद ३४

धनि धंनि ओ राम बेनु बाजै ॥

रागु माली गउड़ा, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ९८८

भगत नामदेव – सबद ३५

मेरो बापु माधउ तू धनु केसौ साँवलीओ बीठुलाइ ॥

रागु माली गउड़ा, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ९८८

भगत नामदेव – सबद ३६

सभै घट रामु बोलै रामा बोलै ॥

रागु माली गउड़ा, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ९८८

भगत नामदेव – सबद ३७

चारि मुकति चारै सिधि मिलि कै दूलह प्रभ की सरनि परिओ ॥

रागु मारू, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०५

भगत नामदेव – सबद ३८

रे जिहबा करउ सत खंड ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६३

भगत नामदेव – सबद ३९

पर धन पर दारा परहरी ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६३

भगत नामदेव – सबद ४०

दूधु कटोरै गडवै पानी ॥

रागु भैरउ, भगत नामदेव, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६३