शिक्षा संसाधन - गुरु नानक

गुरु नानक के ९२८ सबदों पर आधारित शैक्षिक सामग्री जून २०२५ से दिसंबर २०२८ के बीच चरणबद्ध तरीके से जारी की जा रही है।

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गुरु नानक सबद (੬१-७०)

गुरु नानक – सबद ६१

इक तिल पिआरा वीसरै रोग वडा मन माहि ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २१

गुरु नानक – सबद ६२

हरि हरि जपहु पिआरिआ गुरमत ले हरि बोल ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२

गुरु नानक – सबद ६३

भरमे भाहि न विझवै जे भवै दिसंतर देस ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२

गुरु नानक – सबद ६४

वणज करहु वणजारिहो वखर लेह समाल ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२

गुरु नानक – सबद ६५

धन जोबन अर फुलड़ा नाठीअड़े दिन चार ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २३

गुरु नानक – सबद ६६

आपे रसीआ आप रस आपे रावणहार ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २३

गुरु नानक – सबद ६७

इहु तन धरती बीज करमा करो सलिल आपाउ सारिंगपाणी ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २३

गुरु नानक – सबद ६८

अमल कर धरती बीज सबदो कर सच की आब नित देह पाणी ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४

गुरु नानक – सबद ६९

सोई मउला जिन जग मउलिआ हरिआ कीआ संसारो ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४

गुरु नानक – सबद ७०

एक सुआन दुइ सुआनी नाल ॥

राग सिरिराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४

गुरु नानक – सबद ७१

एका सुरत जेते है जीअ ॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४

गुरु नानक – सबद ७२

तू दरीआउ दाना बीना मै मछुली कैसे अंत लहा ॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २५

गुरु नानक – सबद ७३

कीता कहा करे मन मान ॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २५

गुरु नानक – सबद ७४

अछल छलाई नह छलै नह घाउ कटारा कर सकै ॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २५

गुरु नानक – सबद ७५

आख आख मन वावणा जिउ जिउ जापै वाइ ॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५३

गुरु नानक – सबद ७६

सभे कंत महेलीआ सगलीआ करह सीगार ॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५३

गुरु नानक – सबद ७७

आपे गुण आपे कथै आपे सुण वीचार ॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५४

गुरु नानक – सबद ७८

मछुली जाल न जाणिआ सर खारा असगाहु॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५५

गुरु नानक – सबद ७९

मन जूठै तन जूठ है जिहवा जूठी होइ ॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५५

गुरु नानक – सबद ८०

जप तप संजम साधीऐ तीरथ कीचै वास ॥

राग सिरीराग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५६