गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
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गुरु नानक सबद (੬१-८०)
गुरु नानक – सबद ६१
इकु तिलु पिआरा वीसरै रोगु वडा मन माहि ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २१
गुरु नानक – सबद ६२
हरि हरि जपहु पिआरिआ गुरमति ले हरि बोलि ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२
गुरु नानक – सबद ६३
भरमे भाहि न विझवै जे भवै दिसंतर देसु ॥
गुरु नानक – सबद ६४
वणजु करहु वणजारिहो वखरु लेहु समालि ॥
गुरु नानक – सबद ६५
धनु जोबनु अरु फुलड़ा नाठीअड़े दिन चारि ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २३
गुरु नानक – सबद ६६
आपे रसीआ आपि रसु आपे रावणहारु ॥
गुरु नानक – सबद ६७
इहु तनु धरती बीजु करमा करो सलिल आपाउ सारिंगपाणी ॥
गुरु नानक – सबद ६८
अमलु करि धरती बीजु सबदो करि सच की आब नित देहि पाणी ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४
गुरु नानक – सबद ६९
सोई मउला जिनि जगु मउलिआ हरिआ कीआ संसारो ॥
गुरु नानक – सबद ७०
एकु सुआनु दुइ सुआनी नालि ॥
गुरु नानक – सबद ७१
एका सुरति जेते है जीअ ॥
रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४
गुरु नानक – सबद ७२
तू दरीआउ दाना बीना मै मछुली कैसे अंतु लहा ॥
रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २५
गुरु नानक – सबद ७३
कीता कहा करे मनि मानु ॥
गुरु नानक – सबद ७४
अछल छलाई नह छलै नह घाउ कटारा करि सकै ॥
गुरु नानक – सबद ७५
आखि आखि मनु वावणा जिउ जिउ जापै वाइ ॥
रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५३
गुरु नानक – सबद ७६
सभे कंत महेलीआ सगलीआ करहि सीगारु ॥
गुरु नानक – सबद ७७
आपे गुण आपे कथै आपे सुणि वीचारु ॥
रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५४
गुरु नानक – सबद ७८
मछुली जालु न जाणिआ सरु खारा असगाहु ॥
रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५५
गुरु नानक – सबद ७९
मनि जूठै तनि जूठि है जिहवा जूठी होइ ॥
गुरु नानक – सबद ८०
जपु तपु संजमु साधीऐ तीरथि कीचै वासु ॥
रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५६
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