गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (७२१-७४०)

गुरु नानक - सबद ७२१

बरसै अंमृत धार बूँद सुहावणी ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०७

गुरु नानक - सबद ७२२

चेतु बसंतु भला भवर सुहावड़े ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०७

गुरु नानक - सबद ७२३

वैसाखु भला साखा वेस करे ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०८

गुरु नानक - सबद ७२४

माहु जेठु भला प्रीतमु किउ बिसरै ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०८

गुरु नानक - सबद ७२५

आसाड़ु भला सूरजु गगनि तपै ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०८

गुरु नानक - सबद ७२६

सावणि सरस मना घण वरसहि रुति आए ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०८

गुरु नानक - सबद ७२७

भादउ भरमि भुली भरि जोबनि पछुताणी ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०८

गुरु नानक - सबद ७२८

असुनि आउ पिरा सा धन झूरि मुई ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०८

गुरु नानक - सबद ७२९

कतकि किरतु पइआ जो प्रभ भाइआ ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०९

गुरु नानक - सबद ७३०

मंघर माहु भला हरि गुण अंकि समावए ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०९

गुरु नानक - सबद ७३१

पोखि तुखारु पड़ै वणु तृणु रसु सोखै ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०९

गुरु नानक - सबद ७३२

माघि पुनीत भई तीरथु अंतरि जानिआ ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०९

गुरु नानक - सबद ७३३

फलगुनि मनि रहसी प्रेमु सुभाइआ ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०९

गुरु नानक - सबद ७३४

बे दस माह रुती थिती वार भले ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०९

गुरु नानक - सबद ७३५

पहिलै पहरै नैण सलोनड़ीए रैणि अंधिआरी राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११०

गुरु नानक - सबद ७३६

दूजा पहरु भइआ जागु अचेती राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११०

गुरु नानक - सबद ७३७

तीजा पहरु भइआ नीद विआपी राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११०

गुरु नानक - सबद ७३८

चउथा पहरु भइआ दउतु बिहागै राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११०

गुरु नानक - सबद ७३९

खूली गंठि उठो लिखिआ आइआ राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११०

गुरु नानक - सबद ७४०

तारा चड़िआ लंमा किउ नदरि निहालिआ राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११०