गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ १५
गुरु नानक सबद (२८१-३००)
गुरु नानक – सबद २८१
एकु मरै पंचे मिलि रोवहि ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४१२
गुरु नानक – सबद २८२
आपु वीचारै सु परखे हीरा ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४१३
गुरु नानक – सबद २८३
गुरमुखि गिआनु धिआनु मनि मानु ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४१४
गुरु नानक – सबद २८४
गावहि गीते चीति अनीते ॥
गुरु नानक – सबद २८५
मनु मैगलु साकतु देवाना ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४१५
गुरु नानक – सबद २८६
तनु बिनसै धनु का को कहीऐ ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४१६
गुरु नानक – सबद २८७
गुरु सेवे सो ठाकुर जानै ॥
गुरु नानक – सबद २८८
जिन सिरि सोहनि पटीआ माँगी पाइ संधूरु ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४१७
गुरु नानक – सबद २८९
कहा सु खेल तबेला घोड़े कहा भेरी सहनाई ॥
गुरु नानक – सबद २९०
जैसे गोइलि गोइली तैसे संसारा ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४१८
गुरु नानक – सबद २९१
चारे कुँडा ढूढीआ को नीम्मी मैडा ॥
गुरु नानक – सबद २९२
मनसा मनहि समाइले भउजलु सचि तरणा ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४१९
गुरु नानक – सबद २९३
चले चलणहार वाट वटाइआ ॥
गुरु नानक – सबद २९४
किआ जंगलु ढूढी जाइ मै घरि बनु हरीआवला ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४२०
गुरु नानक – सबद २९५
जिन्नी नामु विसारिआ दूजै भरमि भुलाई ॥
गुरु नानक – सबद २९६
रूड़ो ठाकुर माहरो रूड़ी गुरबाणी ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४२१
गुरु नानक – सबद २९७
केता आखणु आखीऐ ता के अंत न जाणा ॥
गुरु नानक – सबद २९८
मनु रातउ हरि नाइ सचु वखाणिआ ॥
गुरु नानक – सबद २९९
आवण जाणा किउ रहै किउ मेला होई ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४२२
गुरु नानक – सबद ३००
ससै सोइ सृसटि जिनि साजी सभना साहिबु एकु भइआ ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४३२
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