गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (३६१-३८०)

गुरु नानक – सबद ३६१

लख चोरीआ लख जारीआ लख कूड़ीआ लख गालि ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७१

गुरु नानक – सबद ३६२

नाइ मंनिऐ पति ऊपजै सालाही सचु सूतु ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७१

गुरु नानक – सबद ३६३

तगु न इंद्री तगु न नारी ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७१

गुरु नानक – सबद ३६४

साहिबु होइ दइआलु किरपा करे ता साई कार कराइसी ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७१

गुरु नानक – सबद ३६५

गऊ बिराहमण कउ करु लावहु गोबरि तरणु न जाई ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७१

गुरु नानक – सबद ३६६

माणस खाणे करहि निवाज ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७१

गुरु नानक – सबद ३६७

चितै अंदरि सभु को वेखि नदरी हेठि चलाइदा ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७२

गुरु नानक – सबद ३६८

जे मोहाका घरु मुहै घरु मुहि पितरी देइ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७२

गुरु नानक – सबद ३६९

जिउ जोरू सिरनावणी आवै वारो वार ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७२

गुरु नानक – सबद ३७०

तुरे पलाणे पउण वेग हर रंगी हरम सवारिआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७२

गुरु नानक - सबद ३७१

जे करि सूतकु मंनीऐ सभ तै सूतकु होइ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७२

गुरु नानक - सबद ३७२

मन का सूतकु लोभु है जिहवा सूतकु कूड़ु ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७२

गुरु नानक - सबद ३७३

सभो सूतकु भरमु है दूजै लगै जाइ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७२

गुरु नानक - सबद ३७४

सतिगुरु वडा करि सालाहीऐ जिसु विचि वडीआ वडिआईआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७३

गुरु नानक - सबद ३७५

पहिला सुचा आपि होइ सुचै बैठा आइ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७३

गुरु नानक - सबद ३७६

भंडि जंमीऐ भंडि निंमीऐ भंडि मंगणु वीआहु ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७३

गुरु नानक - सबद ३७७

सभु को आखै आपणा जिसु नाही सो चुणि कढीऐ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७३

गुरु नानक - सबद ३७८

नानक फिकै बोलिऐ तनु मनु फिका होइ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७३

गुरु नानक - सबद ३७९

अंदरहु झूठे पैज बाहरि दुनीआ अंदरि फैलु ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७३

गुरु नानक - सबद ३८०

आपे ही करणा कीओ कल आपे ही तै धारीऐ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७४