गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (९२१-९४०)

गुरु नानक - सबद ९२१

भाँडा धोवै कउणु जि कचा साजिआ ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४११

गुरु नानक - सबद ९२२

सो ब्रहमणु जो बिंदै ब्रहमु ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४११

गुरु नानक - सबद ९२३

जउ तउ प्रेम खेलण का चाउ ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१२

गुरु नानक - सबद ९२४

मन महि झूरै रामचंदु सीता लछमण जोगु ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१२

गुरु नानक - सबद ९२५

लाहौर सहरु जहरु कहरु सवा पहरु ॥२७॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१२

गुरु नानक - सबद ९२६

उदोसाहै किआ नीसानी तोटि न आवै अंनी ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१२

गुरु नानक - सबद ९२७

रजि न कोई जीविआ पहुचि न चलिआ कोइ ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१२

गुरु नानक - सबद ९२८

दोसु न देअहु राइ नो मति चलै जाँ बुढा होवै ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१२