गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (७४१-७६०)

गुरु नानक - सबद ७४१

गुरमुखि जागि रहे चूकी अभिमानी राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११११

गुरु नानक - सबद ७४२

अउगण वीसरिआ गुणी घरु कीआ राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११११

गुरु नानक - सबद ७४३

आवण जाण रहे चूका भोला राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११११

गुरु नानक - सबद ७४४

भोलावड़ै भुली भुलि भुलि पछोताणी ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११११

गुरु नानक - सबद ७४५

सुणि नाह पिआरे इक बेनंती मेरी ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११११

गुरु नानक - सबद ७४६

साजन देसि विदेसीअड़े सानेहड़े देदी ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११११

गुरु नानक – ७४७

महलि बुलाइड़ीए बिलमु न कीजै ॥

राग तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११११

गुरु नानक - सबद ७४८

मेरे लाल रंगीले हम लालन के लाले ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११२

गुरु नानक - सबद ७४९

भरिपुरि धारि रहे अति पिआरे ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११२

गुरु नानक - सबद ७५०

गुण गुणहि समाणे मसतकि नाम नीसाणो ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११२

गुरु नानक - सबद ७५१

सच घरु खोजि लहे साचा गुर थानो ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११२

गुरु नानक - सबद ७५२

ए मन मेरिआ तू समझु अचेत इआणिआ राम ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १११२

गुरु नानक - सबद ७५३

तुझ ते बाहरि किछू न होइ ॥

रागु भैरउ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२५

गुरु नानक - सबद ७५४

गुर कै सबदि तरे मुनि केते इंद्रादिक ब्रहमादि तरे ॥

रागु भैरउ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२५

गुरु नानक - सबद ७५५

नैनी दृसटि नही तनु हीना जरि जीतिआ सिरि कालो ॥

रागु भैरउ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२५

गुरु नानक - सबद ७५६

भूँडी चाल चरण कर खिसरे तुचा देह कुमलानी ॥

रागु भैरउ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२६

गुरु नानक - सबद ७५७

सगली रैणि सोवत गलि फाही दिनसु जंजालि गवाइआ ॥

रागु भैरउ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२६

गुरु नानक - सबद ७५८

गुर कै संगि रहै दिनु राती रामु रसनि रंगि राता ॥

रागु भैरउ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२६

गुरु नानक - सबद ७५९

हिरदै नामु सरब धनु धारणु गुर परसादी पाईऐ ॥

रागु भैरउ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२७

गुरु नानक - सबद ७६०

जगन होम पुँन तप पूजा देह दुखी नित दूख सहै ॥

रागु भैरउ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११२७