गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (२२१-२४०)

गुरु नानक – सबद २२१

प्रथमे ब्रहमा कालै घरि आइआ ॥

रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२७

गुरु नानक – सबद २२२

बोलहि साचु मिथिआ नही राई ॥

रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२७

गुरु नानक – सबद २२३

रामि नामि चितु रापै जा का ॥

रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२८

गुरु नानक – सबद २२४

गुर परसादी बूझि ले तउ होइ निबेरा ॥

रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२९

गुरु नानक – सबद २२५

सुणि नाह प्रभू जीउ एकलड़ी बन माहे ॥

रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४३

गुरु नानक – सबद २२६

पिरि छोडिअड़ी जीउ कवणु मिलावै ॥

रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४३

गुरु नानक – सबद २२७

माइआ मोहणी नीघरीआ जीउ कूड़ि मुठी कूड़िआरे ॥

रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४३

गुरु नानक – सबद २२८

तेरा नामु सचा जीउ सबदु सचा वीचारो ॥

रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४३

गुरु नानक – सबद २२९

मुँध रैणि दुहेलड़ीआ जीउ नीद न आवै ॥

रागु गउड़ी पूरबी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४२

गुरु नानक – सबद २३०

मुँध निमानड़ीआ जीउ बिनु धनी पिआरे ॥

रागु गउड़ी पूरबी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४२

गुरु नानक – सबद २३१

मिलु सखी सहेलड़ीहो हम पिरु रावेहा ॥

रागु गउड़ी पूरबी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४२

गुरु नानक – सबद २३२

मेरी इछ पुनी जीउ हम घरि साजनु आइआ ॥

रागु गउड़ी पूरबी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४२

गुरु नानक – सबद २३३

सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब समाले ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८

गुरु नानक – सबद २३४

सुणि वडा आखै सभु कोइ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९

गुरु नानक – सबद २३५

आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९

गुरु नानक – सबद २३६

तितु सरवरड़ै भईले निवासा पाणी पावकु तिनहि कीआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२

गुरु नानक – सबद २३७

छिअ घर छिअ गुर छिअ उपदेस ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२

गुरु नानक – सबद २३८

सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब सम्माले ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ३४७

गुरु नानक – सबद २३९

सुणि वडा आखै सभ कोई ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ३४८

गुरु नानक – सबद २४०

आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ३४९