गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ १२
गुरु नानक सबद (२२१-२४०)
गुरु नानक – सबद २२१
प्रथमे ब्रहमा कालै घरि आइआ ॥
रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२७
गुरु नानक – सबद २२२
बोलहि साचु मिथिआ नही राई ॥
गुरु नानक – सबद २२३
रामि नामि चितु रापै जा का ॥
रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२८
गुरु नानक – सबद २२४
गुर परसादी बूझि ले तउ होइ निबेरा ॥
रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२९
गुरु नानक – सबद २२५
सुणि नाह प्रभू जीउ एकलड़ी बन माहे ॥
रागु गउड़ी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४३
गुरु नानक – सबद २२६
पिरि छोडिअड़ी जीउ कवणु मिलावै ॥
गुरु नानक – सबद २२७
माइआ मोहणी नीघरीआ जीउ कूड़ि मुठी कूड़िआरे ॥
गुरु नानक – सबद २२८
तेरा नामु सचा जीउ सबदु सचा वीचारो ॥
गुरु नानक – सबद २२९
मुँध रैणि दुहेलड़ीआ जीउ नीद न आवै ॥
रागु गउड़ी पूरबी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २४२
गुरु नानक – सबद २३०
मुँध निमानड़ीआ जीउ बिनु धनी पिआरे ॥
गुरु नानक – सबद २३१
मिलु सखी सहेलड़ीहो हम पिरु रावेहा ॥
गुरु नानक – सबद २३२
मेरी इछ पुनी जीउ हम घरि साजनु आइआ ॥
गुरु नानक – सबद २३३
सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब समाले ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८
गुरु नानक – सबद २३४
सुणि वडा आखै सभु कोइ ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९
गुरु नानक – सबद २३५
आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥
गुरु नानक – सबद २३६
तितु सरवरड़ै भईले निवासा पाणी पावकु तिनहि कीआ ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२
गुरु नानक – सबद २३७
छिअ घर छिअ गुर छिअ उपदेस ॥
गुरु नानक – सबद २३८
सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब सम्माले ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ३४७
गुरु नानक – सबद २३९
सुणि वडा आखै सभ कोई ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ३४८
गुरु नानक – सबद २४०
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ३४९
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