गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (४४१-४६०)

गुरु नानक - सबद ४४१

जीवा तेरै नाइ मनि आनंदु है जीउ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८८

गुरु नानक - सबद ४४२

तुम सरि अवरु न कोइ आइआ जाइसी जीउ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८८

गुरु नानक - सबद ४४३

तू सचा सिरजणहारु अलख सिरंदिआ जीउ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८८

गुरु नानक - सबद ४४४

भगत सोहहि दरवारि सबदि सुहाइआ जीउ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८८

गुरु नानक - सबद ४४५

भगत सोहहि दरवारि सबदि सुहाइआ जीउ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८८

गुरु नानक - सबद ४४६

पिर संगि मूठड़ीए खबरि न पाईआ जीउ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८९

गुरु नानक - सबद ४४७

बूडी घरु घालिओ गुर कै भाइ चलो ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८९

गुरु नानक - सबद ४४८

बूडी घरु घालिओ गुर कै भाइ चलो ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८९

गुरु नानक - सबद ४४९

पिर घरि सोहै नारि जे पिर भावए जीउ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८९

गुरु नानक - सबद ४५०

धन सोहागणि नारि जिनि पिरु जाणिआ जीउ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८९

गुरु नानक - सबद ४५१

यक अरज गुफतम पेसि तो दर गोस कुन करतार ॥

रागु तिलंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२१

गुरु नानक - सबद ४५२

भउ तेरा भाँग खलड़ी मेरा चीतु ॥

रागु तिलंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२१

गुरु नानक - सबद ४५३

इहु तनु माइआ पाहिआ पिआरे लीतड़ा लबि रंगाए ॥

रागु तिलंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२१

गुरु नानक - सबद ४५४

इआनड़ीए मानड़ा काइ करेहि ॥

रागु तिलंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२२

गुरु नानक - सबद ४५५

जैसी मै आवै खसम की बाणी तैसड़ा करी गिआनु वे लालो ॥

रागु तिलंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२२

गुरु नानक - सबद ४५६

जिनि कीआ तिनि देखिआ किआ कहीऐ रे भाई ॥

रागु तिलंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२४

गुरु नानक - सबद ४५७

भाँडा धोइ बैसि धूपु देवहु तउ दूधै कउ जावहु ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२८

गुरु नानक - सबद ४५८

अंतरि वसै न बाहरि जाइ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२८

गुरु नानक - सबद ४५९

उजलु कैहा चिलकणा घोटिम कालड़ी मसु ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२९

गुरु नानक - सबद ४६०

जप तप का बंधु बेड़ुला जितु लंघहि वहेला ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२९