गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (१०१-१२०)

गुरु नानक – सबद १०१

दूजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा भरि जोबनि मै मति ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७५

गुरु नानक – सबद १०२

तीजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा सरि हंस उलथड़े आइ ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७५

गुरु नानक – सबद १०३

चउथै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा बिरधि भइआ तनु खीणु ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६

गुरु नानक – सबद १०४

ओड़कु आइआ तिन साहिआ वणजारिआ मित्रा जरु जरवाणा कंनि ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६

गुरु नानक – सबद १०५

दाती साहिब संदीआ किआ चलै तिसु नालि ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३

गुरु नानक – सबद १०६

सिदकु सबूरी सादिका सबरु तोसा मलाइकाँ ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३

गुरु नानक – सबद १०७

फकड़ जाती फकड़ु नाउ ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३

गुरु नानक – सबद १०८

कुदरति करि कै वसिआ सोइ ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३

गुरु नानक – सबद १०९

गलीं असी चंगीआ आचारी बुरीआह ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८५

गुरु नानक – सबद ११०

कुबुधि डूमणी कुदइआ कसाइणि पर निंदा घट चूहड़ी मुठी क्रोधि चंडालि ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९१

गुरु नानक – सबद १११

किआ हंसु किआ बगुला जा कउ नदरि करेइ ॥

रागु सिरीरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९१

गुरु नानक – सबद ११२

सबदि रंगाए हुकमि सबाए ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९

गुरु नानक – सबद ११३

गुरु दाता गुरु हिवै घरु गुरु दीपकु तिह लोइ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७

गुरु नानक – सबद ११४

पहिलै पिआरि लगा थण दुधि ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७

गुरु नानक – सबद ११५

दस बालतणि बीस रवणि तीसा का सुँदरु कहावै ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८

गुरु नानक – सबद ११६

तूँ करता पुरखु अगंमु है आपि सृसटि उपाती ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८

गुरु नानक – सबद ११७

जीउ पाइ तनु साजिआ रखिआ बणत बणाइ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८

गुरु नानक – सबद ११८

तुधु आपे जगतु उपाइ कै तुधु आपे धंधै लाइआ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८

गुरु नानक – सबद ११९

सदा सदा तूँ एकु है तुधु दूजा खेलु रचाइआ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३९

गुरु नानक – सबद १२०

सुइने कै परबति गुफा करी कै पाणी पइआलि ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३९