गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (३८१-४००)

गुरु नानक - सबद ३८१

जितु सेविऐ सुखु पाईऐ सो साहिबु सदा सम्मालीऐ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७४

गुरु नानक - सबद ३८२

चाकरु लगै चाकरी जे चलै खसमै भाइ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७४

गुरु नानक - सबद ३८३

नानक अंत न जापन्नी हरि ता के पारावार ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७५

गुरु नानक - सबद ३८४

आपे भाँडे साजिअनु आपे पूरणु देइ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७५

गुरु नानक - सबद ३८५

वडे कीआ वडिआईआ किछु कहणा कहणु न जाइ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७५

गुरु नानक - सबद ३८६

तेरा नामु करी चनणाठीआ जे मनु उरसा होइ ॥

रागु गूजरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४८९

गुरु नानक - सबद ३८७

नाभि कमल ते ब्रहमा उपजे बेद पड़हि मुखि कंठि सवारि ॥

रागु गूजरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४८९

गुरु नानक - सबद ३८८

एक नगरी पंच चोर बसीअले बरजत चोरी धावै ॥

रागु गूजरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५०३

गुरु नानक - सबद ३८९

कवन कवन जाचहि प्रभ दाते ता के अंत न परहि सुमार ॥

राग गूजरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५०३

गुरु नानक - सबद ३९०

ऐ जी जनम मरै आवै फुन जावै बिन गुर गत नही काई ॥

राग गूजरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५०४

गुरु नानक - सबद ३९१

ऐ जी ना हम उतम नीच न मधिम हरि सरणागत हरि के लोग ॥

राग गूजरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५०४

गुरु नानक - सबद ३९२

भगति प्रेम आराधितं सच पिआस परम हितं ॥

राग गूजरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५०५

गुरु नानक - सबद ३९३

कली अंदरि नानका जिंनाँ दा अउतारु ॥

रागु बिहागड़ा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५५६

गुरु नानक - सबद ३९४

हिंदू मूले भूले अखुटी जाँही ॥

रागु बिहागड़ा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५५६

गुरु नानक - सबद ३९५

सभु किहु तेरै वसि है तू सचा साहु ॥

रागु बिहागड़ा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५५६

गुरु नानक - सबद ३९६

अमली अमलु न अंबड़ै मछी नीरु न होइ ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५५७

गुरु नानक - सबद ३९७

गुणवंती सहु राविआ निरगुणि कूके काइ ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५५७

गुरु नानक - सबद ३९८

मोरी रुण झुण लाइआ भैणे सावणु आइआ ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५५७

गुरु नानक - सबद ३९९

काइआ कूड़ि विगाड़ि काहे नाईऐ ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५६५

गुरु नानक - सबद ४००

करहु दइआ तेरा नामु वखाणा ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५६६