गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ २२
गुरु नानक सबद (४२१-४४०)
गुरु नानक - सबद ४२१
दुबिधा न पड़उ हरि बिनु होरु न पूजउ मड़ै मसाणि न जाई ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६३४
गुरु नानक - सबद ४२२
आसा मनसा बंधनी भाई करम धरम बंधकारी ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६३५
गुरु नानक - सबद ४२३
जिन्नी सतिगुरु सेविआ पिआरे तिन्न के साथ तरे ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६३६
गुरु नानक - सबद ४२४
तू गुणदातौ निरमलो भाई निरमलु ना मनु होइ ॥
गुरु नानक - सबद ४२५
सोरठि सदा सुहावणी जे सचा मनि होइ ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६४२
गुरु नानक - सबद ४२६
इक दझहि इक दबीअहि इकना कुते खाहि ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६४८
गुरु नानक - सबद ४२७
ता की रजाइ लेखिआ पाइ अब किआ कीजै पाँडे ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५३
गुरु नानक - सबद ४२८
गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥
रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३
गुरु नानक - सबद ४२९
जीउ डरतु है आपणा कै सिउ करी पुकार ॥
रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६०
गुरु नानक - सबद ४३०
हम आदमी हाँ इक दमी मुहलति मुहतु न जाणा ॥
गुरु नानक - सबद ४३१
किउ सिमरी सिवरिआ नही जाइ ॥
रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६१
गुरु नानक - सबद ४३२
नदरि करे ता सिमरिआ जाइ ॥
गुरु नानक - सबद ४३३
जीउ तपतु है बारो बार ॥
गुरु नानक - सबद ४३४
चोरु सलाहे चीतु न भीजै ॥
रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६२
गुरु नानक - सबद ४३५
काइआ कागदु मनु परवाणा ॥
गुरु नानक - सबद ४३६
कालु नाही जोगु नाही नाही सत का ढबु ॥
गुरु नानक - सबद ४३७
रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६३
गुरु नानक - सबद ४३८
गुरु सागरु रतनी भरपूरे ॥
रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८५
गुरु नानक - सबद ४३९
सहजि मिलै मिलिआ परवाणु ॥
रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८६
गुरु नानक - सबद ४४०
तीरथि नावण जाउ तीरथु नामु है ॥
रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८७
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