गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (४२१-४४०)

गुरु नानक - सबद ४२१

दुबिधा न पड़उ हरि बिनु होरु न पूजउ मड़ै मसाणि न जाई ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६३४

गुरु नानक - सबद ४२२

आसा मनसा बंधनी भाई करम धरम बंधकारी ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६३५

गुरु नानक - सबद ४२३

जिन्नी सतिगुरु सेविआ पिआरे तिन्न के साथ तरे ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६३६

गुरु नानक - सबद ४२४

तू गुणदातौ निरमलो भाई निरमलु ना मनु होइ ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६३६

गुरु नानक - सबद ४२५

सोरठि सदा सुहावणी जे सचा मनि होइ ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६४२

गुरु नानक - सबद ४२६

इक दझहि इक दबीअहि इकना कुते खाहि ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६४८

गुरु नानक - सबद ४२७

ता की रजाइ लेखिआ पाइ अब किआ कीजै पाँडे ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६५३

गुरु नानक - सबद ४२८

गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३

गुरु नानक - सबद ४२९

जीउ डरतु है आपणा कै सिउ करी पुकार ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६०

गुरु नानक - सबद ४३०

हम आदमी हाँ इक दमी मुहलति मुहतु न जाणा ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६०

गुरु नानक - सबद ४३१

किउ सिमरी सिवरिआ नही जाइ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६१

गुरु नानक - सबद ४३२

नदरि करे ता सिमरिआ जाइ ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६१

गुरु नानक - सबद ४३३

जीउ तपतु है बारो बार ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६१

गुरु नानक - सबद ४३४

चोरु सलाहे चीतु न भीजै ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६२

गुरु नानक - सबद ४३५

काइआ कागदु मनु परवाणा ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६२

गुरु नानक - सबद ४३६

कालु नाही जोगु नाही नाही सत का ढबु ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६२

गुरु नानक - सबद ४३७

गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६६३

गुरु नानक - सबद ४३८

गुरु सागरु रतनी भरपूरे ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८५

गुरु नानक - सबद ४३९

सहजि मिलै मिलिआ परवाणु ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८६

गुरु नानक - सबद ४४०

तीरथि नावण जाउ तीरथु नामु है ॥

रागु धनासरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ६८७