गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (१४१-१६०)

गुरु नानक - सबद १४१

जाती दै किआ हथि सचु परखीऐ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२

गुरु नानक - सबद १४२

जा पका ता कटिआ रही सु पलरि वाड़ि ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२

गुरु नानक - सबद १४३

वेखु जि मिठा कटिआ कटि कुटि बधा पाइ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२

गुरु नानक - सबद १४४

इकना मरणु न चिति आस घणेरिआ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२

गुरु नानक - सबद १४५

मछी तारू किआ करे पंखी किआ आकासु ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४३

गुरु नानक - सबद १४६

कैहा कंचनु तुटै सारु ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४३

गुरु नानक - सबद १४७

आपे कुदरति साजि कै आपे करे बीचारु ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४३

गुरु नानक - सबद १४८

हम जेर जिमी दुनीआ पीरा मसाइका राइआ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४३

गुरु नानक - सबद १४९

न देव दानवा नरा ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४३

गुरु नानक - सबद १५०

न दादे दिहंद आदमी ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १५१

न सूर ससि मंडलो ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १५२

न रिजकु दसत आ कसे ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १५३

परंदए न गिराह जर ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १५४

नानक लिलारि लिखिआ सोइ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १५५

सचा तेरा हुकमु गुरमुखि जाणिआ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १५६

सीहा बाजा चरगा कुहीआ एना खवाले घाह ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १५७

इकि मासहारी इकि तृणु खाहि ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १५८

पूरे गुर की कार करमि कमाईऐ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १५९

तुधु भावै ता वावहि गावहि तुधु भावै जलि नावहि ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४४

गुरु नानक - सबद १६०

जा तूँ वडा सभि वडिआँईआ चंगै चंगा होई ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४५