गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ २६
गुरु नानक सबद (५०१-५२०)
गुरु नानक - सबद ५०१
दीवा बलै अंधेरा जाइ ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९१
गुरु नानक - सबद ५०२
सबदै सादु न आइओ नामि न लगो पिआरु ॥
गुरु नानक - सबद ५०३
काइआ कूमल फुल गुण नानक गुपसि माल ॥
गुरु नानक - सबद ५०४
पहिल बसंतै आगमनि पहिला मउलिओ सोइ ॥
गुरु नानक - सबद ५०५
तू सुलतानु कहा हउ मीआ तेरी कवन वडाई ॥
रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९५
गुरु नानक - सबद ५०६
मनु मंदरु तनु वेस कलंदरु घट ही तीरथि नावा ॥
गुरु नानक - सबद ५०७
आपे सबदु आपे नीसानु ॥
गुरु नानक - सबद ५०८
गुर बचनी मनु सहज धिआने ॥
रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९६
गुरु नानक - सबद ५०९
निकटि वसै देखै सभु सोई ॥
रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३१
गुरु नानक - सबद ५१०
मन का कहिआ मनसा करै ॥
रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३२
गुरु नानक - सबद ५११
एकम एकंकारु निराला ॥
रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३८
गुरु नानक - सबद ५१२
पंचमी पंच भूत बेताला ॥
रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३९
गुरु नानक - सबद ५१३
नाउ नउमी नवे नाथ नव खंडा ॥
गुरु नानक - सबद ५१४
दुआदसी दइआ दानु करि जाणै ॥
रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४०
गुरु नानक - सबद ५१५
कोई वाहे को लुणै को पाए खलिहानि ॥
रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८५४
गुरु नानक - सबद ५१६
जिसु मनि वसिआ तरिआ सोइ ॥
गुरु नानक - सबद ५१७
मुँध नवेलड़ीआ गोइलि आई राम ॥
रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४३
गुरु नानक - सबद ५१८
सचि नवेलड़ीए जोबनि बाली राम ॥
गुरु नानक - सबद ५१९
स्रीधर मोहिअड़ी पिर संगि सूती राम ॥
गुरु नानक - सबद ५२०
जोति सबाइड़ीए तृभवण सारे राम ॥
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