गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (५०१-५२०)

गुरु नानक - सबद ५०१

दीवा बलै अंधेरा जाइ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९१

गुरु नानक - सबद ५०२

सबदै सादु न आइओ नामि न लगो पिआरु ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९१

गुरु नानक - सबद ५०३

काइआ कूमल फुल गुण नानक गुपसि माल ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९१

गुरु नानक - सबद ५०४

पहिल बसंतै आगमनि पहिला मउलिओ सोइ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९१

गुरु नानक - सबद ५०५

तू सुलतानु कहा हउ मीआ तेरी कवन वडाई ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९५

गुरु नानक - सबद ५०६

मनु मंदरु तनु वेस कलंदरु घट ही तीरथि नावा ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९५

गुरु नानक - सबद ५०७

आपे सबदु आपे नीसानु ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९५

गुरु नानक - सबद ५०८

गुर बचनी मनु सहज धिआने ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९६

गुरु नानक - सबद ५०९

निकटि वसै देखै सभु सोई ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३१

गुरु नानक - सबद ५१०

मन का कहिआ मनसा करै ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३२

गुरु नानक - सबद ५११

एकम एकंकारु निराला ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३८

गुरु नानक - सबद ५१२

पंचमी पंच भूत बेताला ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३९

गुरु नानक - सबद ५१३

नाउ नउमी नवे नाथ नव खंडा ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८३९

गुरु नानक - सबद ५१४

दुआदसी दइआ दानु करि जाणै ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४०

गुरु नानक - सबद ५१५

कोई वाहे को लुणै को पाए खलिहानि ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८५४

गुरु नानक - सबद ५१६

जिसु मनि वसिआ तरिआ सोइ ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८५४

गुरु नानक - सबद ५१७

मुँध नवेलड़ीआ गोइलि आई राम ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४३

गुरु नानक - सबद ५१८

सचि नवेलड़ीए जोबनि बाली राम ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४३

गुरु नानक - सबद ५१९

स्रीधर मोहिअड़ी पिर संगि सूती राम ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४३

गुरु नानक - सबद ५२०

जोति सबाइड़ीए तृभवण सारे राम ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४३