गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (५२१-५४०)

गुरु नानक - सबद ५२१

मै मनि चाउ घणा साचि विगासी राम ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४३

गुरु नानक - सबद ५२२

भिंनड़ी रैणि भली दिनस सुहाए राम ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४४

गुरु नानक - सबद ५२३

जागु सलोनड़ीए बोलै गुरबाणी राम ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४४

गुरु नानक - सबद ५२४

महलि बुलाइड़ीए भगति सनेही राम ॥

रागु बिलावलु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८४४

गुरु नानक - सबद ५२५

कोई पड़ता सहसाकिरता कोई पड़ै पुराना ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७६

गुरु नानक - सबद ५२६

सरब जोति तेरी पसरि रही ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७६

गुरु नानक - सबद ५२७

जितु दरि वसहि कवनु दरु कहीऐ दरा भीतरि दरु कवनु लहै ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७७

गुरु नानक - सबद ५२८

सुरति सबदु साखी मेरी सिंङी बाजै लोकु सुणे ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७७

गुरु नानक - सबद ५२९

सुणि माछिंद्रा नानकु बोलै ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७७

गुरु नानक - सबद ५३०

हम डोलत बेड़ी पाप भरी है पवणु लगै मतु जाई ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७८

गुरु नानक - सबद ५३१

सुरती सुरति रलाईऐ एतु ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७८

गुरु नानक - सबद ५३२

तुधनो निवणु मंनणु तेरा नाउ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७८

गुरु नानक - सबद ५३३

सागर महि बूँद बूँद महि सागरु कवणु बुझै बिधि जाणै ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७८

गुरु नानक - सबद ५३४

जा हरि प्रभि किरपा धारी ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७९

गुरु नानक - सबद ५३५

छादनु भोजनु मागतु भागै ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८७९

गुरु नानक - सबद ५३६

सोई चंदु चड़हि से तारे सोई दिनीअरु तपत रहै ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०२

गुरु नानक - सबद ५३७

जगु परबोधहि मड़ी बधावहि ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०२

गुरु नानक - सबद ५३८

खटु मटु देही मनु बैरागी ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०३

गुरु नानक - सबद ५३९

साहा गणहि न करहि बीचारु ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०४

गुरु नानक - सबद ५४०

हठु निग्रहु करि काइआ छीजै ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०४