गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ १०
गुरु नानक सबद (१८१-२००)
गुरु नानक – सबद १८१
सतिगुरु होइ दइआलु त सरधा पूरीऐ ॥
रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४९
गुरु नानक – सबद १८२
सिरु खोहाइ पीअहि मलवाणी जूठा मंगि मंगि खाही ॥
गुरु नानक – सबद १८३
तुधु सचे सुबहानु सदा कलाणिआ ॥
रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १५०
गुरु नानक – सबद १८४
आपि बुझाए सोई बूझै ॥
गुरु नानक – सबद १८५
हउ ढाढी वेकारु कारै लाइआ ॥
गुरु नानक – सबद १८६
जै घरि कीरति आखीऐ करते का होइ बीचारो ॥
रागु गउड़ी दीपकी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२
गुरु नानक – सबद १८७
भउ मुचु भारा वडा तोलु ॥
रागु गउड़ी गुआरेरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १५१
गुरु नानक – सबद १८८
निधि सिधि निरमल नामु बीचारु ॥
रागु गउड़ी गुआरेरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२०
गुरु नानक – सबद १८९
मनु कुँचरु काइआ उदिआनै ॥
रागु गउड़ी गुआरेरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२१
गुरु नानक – सबद १९०
ना मनु मरै न कारजु होइ ॥
रागु गउड़ी गुआरेरी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२२
गुरु नानक – सबद १९१
हउमै करतिआ नह सुखु होइ ॥
गुरु नानक – सबद १९२
अंमृत काइआ रहै सुखाली बाजी इहु संसारो ॥
रागु गउड़ी चेती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १५४
गुरु नानक – सबद १९३
अवरि पंच हम एक जना किउ राखउ घर बारु मना ॥
रागु गउड़ी चेती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १५५
गुरु नानक – सबद १९४
मुँद्रा ते घट भीतरि मुँद्रा काँइआ कीजै खिंथाता ॥
गुरु नानक – सबद १९५
अउखध मंत्र मूलु मन एकै जे करि दृड़ु चितु कीजै रे ॥
रागु गउड़ी चेती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १५६
गुरु नानक – सबद १९६
कत की माई बापु कत केरा किदू थावहु हम आए ॥
गुरु नानक – सबद १९७
रैणि गवाई सोइ कै दिवसु गवाइआ खाइ ॥
रागु गउड़ी बैरागणि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १५६
गुरु नानक – सबद १९८
हरणी होवा बनि बसा कंद मूल चुणि खाउ ॥
रागु गउड़ी बैरागणि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १५७
गुरु नानक – सबद १९९
जिउ गाई कउ गोइली राखहि करि सारा ॥
रागु गउड़ी बैरागणि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २२८
गुरु नानक – सबद २००
रागु गउड़ी पूरबी दीपकी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १५७
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