गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (४८१-५००)

गुरु नानक - सबद ४८१

आवहु सजणा हउ देखा दरसनु तेरा राम ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६५

गुरु नानक - सबद ४८२

जिनि कीआ तिनि देखिआ जगु धंधड़ै लाइआ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६५

गुरु नानक - सबद ४८३

मेरा मनु राता गुण रवै मनि भावै सोई ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६६

गुरु नानक - सबद ४८४

सूहा रंगु सुपनै निसी बिनु तागे गलि हारु ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८६

गुरु नानक - सबद ४८५

वाहु खसम तू वाहु जिनि रचि रचना हम कीए ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८८

गुरु नानक - सबद ४८६

उजल मोती सोहणे रतना नालि जुड़ंनि ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८८

गुरु नानक - सबद ४८७

नानक इहु तनु जालि जिनि जलिऐ नामु विसारिआ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८९

गुरु नानक - सबद ४८८

नानक मन के कंम फिटिआ गणत न आवही ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८९

गुरु नानक - सबद ४८९

नानक बदरा माल का भीतरि धरिआ आणि ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८९

गुरु नानक - सबद ४९०

नावण चले तीरथी मनि खोटै तनि चोर ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८९

गुरु नानक - सबद ४९१

दुइ दीवे चउदह हटनाले ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८९

गुरु नानक - सबद ४९२

राती होवनि कालीआ सुपेदा से वंन ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८९

गुरु नानक - सबद ४९३

चोरा जारा रंडीआ कुटणीआ दीबाणु ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९०

गुरु नानक - सबद ४९४

बाँगा बुरगू सिंङीआ नाले मिली कलाण ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९०

गुरु नानक - सबद ४९५

सतिगुर भीखिआ देहि मै तूँ संम्रथु दातारु ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९०

गुरु नानक - सबद ४९६

इको कंतु सबाईआ जिती दरि खड़ीआह ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९०

गुरु नानक - सबद ४९७

सभे कंतै रतीआ मै दोहागणि कितु ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९०

गुरु नानक - सबद ४९८

हउ बलिहारी तिन कउ सिफति जिना दै वाति ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९०

गुरु नानक - सबद ४९९

जिनी न पाइओ प्रेम रसु कंत न पाइओ साउ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९०

गुरु नानक - सबद ५००

सउ ओलाम्मे दिनै के राती मिलनि् सहंस ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९०