गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ २५
गुरु नानक सबद (४८१-५००)
गुरु नानक - सबद ४८१
आवहु सजणा हउ देखा दरसनु तेरा राम ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६५
गुरु नानक - सबद ४८२
जिनि कीआ तिनि देखिआ जगु धंधड़ै लाइआ ॥
गुरु नानक - सबद ४८३
मेरा मनु राता गुण रवै मनि भावै सोई ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६६
गुरु नानक - सबद ४८४
सूहा रंगु सुपनै निसी बिनु तागे गलि हारु ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८६
गुरु नानक - सबद ४८५
वाहु खसम तू वाहु जिनि रचि रचना हम कीए ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८८
गुरु नानक - सबद ४८६
उजल मोती सोहणे रतना नालि जुड़ंनि ॥
गुरु नानक - सबद ४८७
नानक इहु तनु जालि जिनि जलिऐ नामु विसारिआ ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७८९
गुरु नानक - सबद ४८८
नानक मन के कंम फिटिआ गणत न आवही ॥
गुरु नानक - सबद ४८९
नानक बदरा माल का भीतरि धरिआ आणि ॥
गुरु नानक - सबद ४९०
नावण चले तीरथी मनि खोटै तनि चोर ॥
गुरु नानक - सबद ४९१
दुइ दीवे चउदह हटनाले ॥
गुरु नानक - सबद ४९२
राती होवनि कालीआ सुपेदा से वंन ॥
गुरु नानक - सबद ४९३
चोरा जारा रंडीआ कुटणीआ दीबाणु ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७९०
गुरु नानक - सबद ४९४
बाँगा बुरगू सिंङीआ नाले मिली कलाण ॥
गुरु नानक - सबद ४९५
सतिगुर भीखिआ देहि मै तूँ संम्रथु दातारु ॥
गुरु नानक - सबद ४९६
इको कंतु सबाईआ जिती दरि खड़ीआह ॥
गुरु नानक - सबद ४९७
सभे कंतै रतीआ मै दोहागणि कितु ॥
गुरु नानक - सबद ४९८
हउ बलिहारी तिन कउ सिफति जिना दै वाति ॥
गुरु नानक - सबद ४९९
जिनी न पाइओ प्रेम रसु कंत न पाइओ साउ ॥
गुरु नानक - सबद ५००
सउ ओलाम्मे दिनै के राती मिलनि् सहंस ॥
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