गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (४०१-४२०)

गुरु नानक - सबद ४०१

धंनु सिरंदा सचा पातिसाहु जिनि जगु धंधै लाइआ ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५७८

गुरु नानक - सबद ४०२

आवहु मिलहु सहेलीहो सचड़ा नामु लएहाँ ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५७९

गुरु नानक - सबद ४०३

जिनि जगु सिरजि समाइआ सो साहिबु कुदरति जाणोवा ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५८१

गुरु नानक - सबद ४०४

बाबा आइआ है उठि चलणा इहु जगु झूठु पसारोवा ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५८१

गुरु नानक - सबद ४०५

जालउ ऐसी रीति जितु मै पिआरा वीसरै ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९०

गुरु नानक - सबद ४०६

घर ही मुँधि विदेसि पिरु नित झूरे संम्हाले ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९४

गुरु नानक - सबद ४०७

नानक गाली कूड़ीआ बाझु परीति करेइ ॥

रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९४

गुरु नानक - सबद ४०८

सचु सिरंदा सचा जाणीऐ सचड़ा परवदगारो ॥

रागु वडहंसु दखणी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५८०

गुरु नानक - सबद ४०९

सभना मरणा आइआ वेछोड़ा सभनाह ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९५

गुरु नानक - सबद ४१०

मनु हाली किरसाणी करणी सरमु पाणी तनु खेतु ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९५

गुरु नानक - सबद ४११

माइ बाप को बेटा नीका ससुरै चतुरु जवाई ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९६

गुरु नानक - सबद ४१२

पुड़ु धरती पुड़ु पाणी आसणु चारि कुँट चउबारा ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९६

गुरु नानक - सबद ४१३

हउ पापी पतितु परम पाखंडी तू निरमलु निरंकारी ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९६

गुरु नानक - सबद ४१४

अलख अपार अगंम अगोचर ना तिसु कालु न करमा ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९७

गुरु नानक - सबद ४१५

जिउ मीना बिनु पाणीऐ तिउ साकतु मरै पिआस ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९७

गुरु नानक - सबद ४१६

तू प्रभ दाता दानि मति पूरा हम थारे भेखारी जीउ ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९७

गुरु नानक - सबद ४१७

जिसु जल निधि कारणि तुम जगि आए सो अंमृतु गुर पाही जीउ ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९८

गुरु नानक - सबद ४१८

अपना घरु मूसत राखि न साकहि की पर घरु जोहन लागा ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९८

गुरु नानक - सबद ४१९

सरब जीआ सिरि लेखु धुराहू बिनु लेखै नही कोई जीउ ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९८

गुरु नानक - सबद ४२०

जा तिसु भावा तद ही गावा ॥

रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९९