गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ २१
गुरु नानक सबद (४०१-४२०)
गुरु नानक - सबद ४०१
धंनु सिरंदा सचा पातिसाहु जिनि जगु धंधै लाइआ ॥
रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५७८
गुरु नानक - सबद ४०२
आवहु मिलहु सहेलीहो सचड़ा नामु लएहाँ ॥
रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५७९
गुरु नानक - सबद ४०३
जिनि जगु सिरजि समाइआ सो साहिबु कुदरति जाणोवा ॥
रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५८१
गुरु नानक - सबद ४०४
बाबा आइआ है उठि चलणा इहु जगु झूठु पसारोवा ॥
गुरु नानक - सबद ४०५
जालउ ऐसी रीति जितु मै पिआरा वीसरै ॥
रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९०
गुरु नानक - सबद ४०६
घर ही मुँधि विदेसि पिरु नित झूरे संम्हाले ॥
रागु वडहंसु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९४
गुरु नानक - सबद ४०७
नानक गाली कूड़ीआ बाझु परीति करेइ ॥
गुरु नानक - सबद ४०८
सचु सिरंदा सचा जाणीऐ सचड़ा परवदगारो ॥
रागु वडहंसु दखणी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५८०
गुरु नानक - सबद ४०९
सभना मरणा आइआ वेछोड़ा सभनाह ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९५
गुरु नानक - सबद ४१०
मनु हाली किरसाणी करणी सरमु पाणी तनु खेतु ॥
गुरु नानक - सबद ४११
माइ बाप को बेटा नीका ससुरै चतुरु जवाई ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९६
गुरु नानक - सबद ४१२
पुड़ु धरती पुड़ु पाणी आसणु चारि कुँट चउबारा ॥
गुरु नानक - सबद ४१३
हउ पापी पतितु परम पाखंडी तू निरमलु निरंकारी ॥
गुरु नानक - सबद ४१४
अलख अपार अगंम अगोचर ना तिसु कालु न करमा ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९७
गुरु नानक - सबद ४१५
जिउ मीना बिनु पाणीऐ तिउ साकतु मरै पिआस ॥
गुरु नानक - सबद ४१६
तू प्रभ दाता दानि मति पूरा हम थारे भेखारी जीउ ॥
गुरु नानक - सबद ४१७
जिसु जल निधि कारणि तुम जगि आए सो अंमृतु गुर पाही जीउ ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९८
गुरु नानक - सबद ४१८
अपना घरु मूसत राखि न साकहि की पर घरु जोहन लागा ॥
गुरु नानक - सबद ४१९
सरब जीआ सिरि लेखु धुराहू बिनु लेखै नही कोई जीउ ॥
गुरु नानक - सबद ४२०
जा तिसु भावा तद ही गावा ॥
रागु सोरठि, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ५९९
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