गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ ४६
गुरु नानक सबद (९०१-९२०)
गुरु नानक - सबद ९०१
संता की रेणु साध जन संगति हरि कीरति तरु तारी ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३२
गुरु नानक - सबद ९०२
माइआ मोहि सगल जगु छाइआ ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४२
गुरु नानक - सबद ९०३
निवली करम भुअंगम भाठी रेचक पूरक कुँभ करै ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४३
गुरु नानक - सबद ९०४
आखणा सुनणा नामु अधारु ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४४
गुरु नानक - सबद ९०५
राम नामु जपि अंतरि पूजा ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४५
गुरु नानक - सबद ९०६
इकि धुरि बखसि लए गुरि पूरै सची बणत बणाई ॥
गुरु नानक - सबद ९०७
गोतमु तपा अहिलिआ इसत्री तिसु देखि इंद्रु लुभाइआ ॥
रागु प्रभाती दखणी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४४
गुरु नानक - सबद ९०८
पड़ि् पुस्तक संधिआ बादं ॥
सलोक सहसकृती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३५३
गुरु नानक - सबद ९०९
निहफलं तस्य जनमस्य जावद ब्रहम न बिंदते ॥
गुरु नानक - सबद ९१०
जोग सबदं गिआन सबदं बेद सबदं त ब्राहमणह ॥
गुरु नानक - सबद ९११
एक कृस्नं त सरब देवा देव देवा त आतमह ॥
गुरु नानक - सबद ९१२
उतंगी पैओहरी गहिरी गंभीरी ॥
सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१०
गुरु नानक - सबद ९१३
जे तूँ तारू पाणि ताहू पुछु तिड़ंन्न कल ॥
गुरु नानक - सबद ९१४
है है करि कै ओहि करेनि ॥
गुरु नानक - सबद ९१५
रे मन डीगि न डोलीऐ सीधै मारगि धाउ ॥
गुरु नानक - सबद ९१६
बाघु मरै मनु मारीऐ जिसु सतिगुर दीखिआ होइ ॥
गुरु नानक - सबद ९१७
अगनि मरै जलु लोड़ि लहु विणु गुर निधि जलु नाहि ॥
सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४११
गुरु नानक - सबद ९१८
कलर केरी छपड़ी कऊआ मलि मलि नाइ ॥
गुरु नानक - सबद ९१९
जनमे का फलु किआ गणी जाँ हरि भगति न भाउ ॥
गुरु नानक - सबद ९२०
हैनि विरले नाही घणे फैल फकड़ु संसारु ॥१२॥
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