गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (९०१-९२०)

गुरु नानक - सबद ९०१

संता की रेणु साध जन संगति हरि कीरति तरु तारी ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३२

गुरु नानक - सबद ९०२

माइआ मोहि सगल जगु छाइआ ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४२

गुरु नानक - सबद ९०३

निवली करम भुअंगम भाठी रेचक पूरक कुँभ करै ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४३

गुरु नानक - सबद ९०४

आखणा सुनणा नामु अधारु ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४४

गुरु नानक - सबद ९०५

राम नामु जपि अंतरि पूजा ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४५

गुरु नानक - सबद ९०६

इकि धुरि बखसि लए गुरि पूरै सची बणत बणाई ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४५

गुरु नानक - सबद ९०७

गोतमु तपा अहिलिआ इसत्री तिसु देखि इंद्रु लुभाइआ ॥

रागु प्रभाती दखणी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४४

गुरु नानक - सबद ९०८

पड़ि् पुस्तक संधिआ बादं ॥

सलोक सहसकृती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३५३

गुरु नानक - सबद ९०९

निहफलं तस्य जनमस्य जावद ब्रहम न बिंदते ॥

सलोक सहसकृती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३५३

गुरु नानक - सबद ९१०

जोग सबदं गिआन सबदं बेद सबदं त ब्राहमणह ॥

सलोक सहसकृती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३५३

गुरु नानक - सबद ९११

एक कृस्नं त सरब देवा देव देवा त आतमह ॥

सलोक सहसकृती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३५३

गुरु नानक - सबद ९१२

उतंगी पैओहरी गहिरी गंभीरी ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१०

गुरु नानक - सबद ९१३

जे तूँ तारू पाणि ताहू पुछु तिड़ंन्न कल ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१०

गुरु नानक - सबद ९१४

है है करि कै ओहि करेनि ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१०

गुरु नानक - सबद ९१५

रे मन डीगि न डोलीऐ सीधै मारगि धाउ ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१०

गुरु नानक - सबद ९१६

बाघु मरै मनु मारीऐ जिसु सतिगुर दीखिआ होइ ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१०

गुरु नानक - सबद ९१७

अगनि मरै जलु लोड़ि लहु विणु गुर निधि जलु नाहि ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४११

गुरु नानक - सबद ९१८

कलर केरी छपड़ी कऊआ मलि मलि नाइ ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४११

गुरु नानक - सबद ९१९

जनमे का फलु किआ गणी जाँ हरि भगति न भाउ ॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४११

गुरु नानक - सबद ९२०

हैनि विरले नाही घणे फैल फकड़ु संसारु ॥१२॥

सलोक वाराँ ते वधीक, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४११