गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

सबदों की ऑडियो प्लेलिस्ट निर्धारित संगीत-शास्त्र में सुनें।

पृष्ठ ४०

गुरु नानक सबद (७८१-८००)

गुरु नानक - सबद ७८१

हरि बिनु किउ रहीऐ दुखु बिआपै ॥

राग सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९७

गुरु नानक - सबद ७८२

दूरि नाही मेरो प्रभु पिआरा ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९७

गुरु नानक - सबद ७८३

हरि बिनु किउ जीवा मेरी माई ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२३२

गुरु नानक - सबद ७८४

हरि बिनु किउ धीरै मनु मेरा ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२३२

गुरु नानक - सबद ७८५

न भीजै रागी नादी बेदि ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२३७

गुरु नानक - सबद ७८६

नव छिअ खट का करे बीचारु ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२३७

गुरु नानक - सबद ७८७

जिनसि थापि जीआँ कउ भेजै जिनसि थापि लै जावै ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२३८

गुरु नानक - सबद ७८८

गुरमुखि चलतु रचाइओनु गुण परगटी आइआ ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२३८

गुरु नानक - सबद ७८९

नानक तुलीअहि तोल जे जीउ पिछै पाईऐ ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२३९

गुरु नानक - सबद ७९०

आखणि अउखा सुनणि अउखा आखि न जापी आखि ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२३९

गुरु नानक - सबद ७९१

जूठि न रागीं जूठि न वेदीं ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४०

गुरु नानक - सबद ७९२

नानक चुलीआ सुचीआ जे भरि जाणै कोइ ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४०

गुरु नानक - सबद ७९३

दुख विचि जंमणु दुखि मरणु दुखि वरतणु संसारि ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४०

गुरु नानक - सबद ७९४

नानक दुनीआ भसु रंगु भसू हू भसु खेह ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४०

गुरु नानक - सबद ७९५

घरि नाराइणु सभा नालि ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४०

गुरु नानक - सबद ७९६

सभे सुरती जोग सभि सभे बेद पुराण ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४१

गुरु नानक - सबद ७९७

पुरीआ खंडा सिरि करे इक पैरि धिआए ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४१

गुरु नानक - सबद ७९८

है है आखाँ कोटि कोटि कोटी हू कोटि कोटि ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४१

गुरु नानक - सबद ७९९

सभे राती सभि दिह सभि थिती सभि वार ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४१

गुरु नानक - सबद ८००

अखीं परणै जे फिराँ देखाँ सभु आकारु ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४१