गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ ४५
गुरु नानक सबद (८८१-९००)
गुरु नानक - सबद ८८१
धंनु सु कागदु कलम धंनु धनु भाँडा धनु मसु ॥
रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९१
गुरु नानक - सबद ८८२
आपे पटी कलम आपि उपरि लेखु भि तूँ ॥
गुरु नानक - सबद ८८३
तूँ आपे आपि वरतदा आपि बणत बणाई ॥
गुरु नानक - सबद ८८४
नाइ तेरै तरणा नाइ पति पूज ॥
रागु प्रभाती बिभास, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२७
गुरु नानक - सबद ८८५
दुबिधा बउरी मनु बउराइआ ॥
रागु प्रभाती बिभास, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४२
गुरु नानक - सबद ८८६
तेरा नामु रतनु करमु चानणु सुरति तिथै लोइ ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२७
गुरु नानक - सबद ८८७
जै कारणि बेद ब्रहमै उचरे संकरि छोडी माइआ ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२८
गुरु नानक - सबद ८८८
जा कै रूपु नाही जाति नाही नाही मुखु मासा ॥
गुरु नानक - सबद ८८९
ता का कहिआ दरि परवाणु ॥
गुरु नानक - सबद ८९०
अंमृतु नीरु गिआनि मन मजनु अठसठि तीरथ संगि गहे ॥
गुरु नानक - सबद ८९१
गुर परसादी विदिआ वीचारै पड़ि पड़ि पावै मानु ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२९
गुरु नानक - सबद ८९२
आवतु किनै न राखिआ जावतु किउ राखिआ जाइ ॥
गुरु नानक - सबद ८९३
दिसटि बिकारी बंधनि बाँधै हउ तिस कै बलि जाई ॥
गुरु नानक - सबद ८९४
मनु माइआ मनु धाइआ मनु पंखी आकासि ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३०
गुरु नानक - सबद ८९५
जागतु बिगसै मूठो अंधा ॥
गुरु नानक - सबद ८९६
मसटि करउ मूरखु जगि कहीआ ॥
गुरु नानक - सबद ८९७
खाइआ मैलु वधाइआ पैधै घर की हाणि ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३१
गुरु नानक - सबद ८९८
गीत नाद हरख चतुराई ॥
गुरु नानक - सबद ८९९
अंतरि देखि सबदि मनु मानिआ अवरु न राँगनहारा ॥
गुरु नानक - सबद ९००
बारह महि रावल खपि जावहि चहु छिअ महि संनिआसी ॥
रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३२
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