गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (८८१-९००)

गुरु नानक - सबद ८८१

धंनु सु कागदु कलम धंनु धनु भाँडा धनु मसु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९१

गुरु नानक - सबद ८८२

आपे पटी कलम आपि उपरि लेखु भि तूँ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९१

गुरु नानक - सबद ८८३

तूँ आपे आपि वरतदा आपि बणत बणाई ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९१

गुरु नानक - सबद ८८४

नाइ तेरै तरणा नाइ पति पूज ॥

रागु प्रभाती बिभास, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२७

गुरु नानक - सबद ८८५

दुबिधा बउरी मनु बउराइआ ॥

रागु प्रभाती बिभास, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३४२

गुरु नानक - सबद ८८६

तेरा नामु रतनु करमु चानणु सुरति तिथै लोइ ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२७

गुरु नानक - सबद ८८७

जै कारणि बेद ब्रहमै उचरे संकरि छोडी माइआ ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२८

गुरु नानक - सबद ८८८

जा कै रूपु नाही जाति नाही नाही मुखु मासा ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२८

गुरु नानक - सबद ८८९

ता का कहिआ दरि परवाणु ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२८

गुरु नानक - सबद ८९०

अंमृतु नीरु गिआनि मन मजनु अठसठि तीरथ संगि गहे ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२८

गुरु नानक - सबद ८९१

गुर परसादी विदिआ वीचारै पड़ि पड़ि पावै मानु ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२९

गुरु नानक - सबद ८९२

आवतु किनै न राखिआ जावतु किउ राखिआ जाइ ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२९

गुरु नानक - सबद ८९३

दिसटि बिकारी बंधनि बाँधै हउ तिस कै बलि जाई ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३२९

गुरु नानक - सबद ८९४

मनु माइआ मनु धाइआ मनु पंखी आकासि ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३०

गुरु नानक - सबद ८९५

जागतु बिगसै मूठो अंधा ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३०

गुरु नानक - सबद ८९६

मसटि करउ मूरखु जगि कहीआ ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३०

गुरु नानक - सबद ८९७

खाइआ मैलु वधाइआ पैधै घर की हाणि ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३१

गुरु नानक - सबद ८९८

गीत नाद हरख चतुराई ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३१

गुरु नानक - सबद ८९९

अंतरि देखि सबदि मनु मानिआ अवरु न राँगनहारा ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३१

गुरु नानक - सबद ९००

बारह महि रावल खपि जावहि चहु छिअ महि संनिआसी ॥

रागु प्रभाती, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३३२