गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (८०१-८२०)

गुरु नानक - सबद ८०१

होरु सरीकु होवै कोई तेरा तिसु अगै तुधु आखाँ ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४२

गुरु नानक - सबद ८०२

जाँ न सिआ किआ चाकरी जाँ जंमे किआ कार ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४२

गुरु नानक - सबद ८०३

सासत्र बेद पुराण पड़्ड़ंता ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४२

गुरु नानक - सबद ८०४

जाँ हउ तेरा ताँ सभु किछु मेरा हउ नाही तू होवहि ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४२

गुरु नानक - सबद ८०५

कलि होई कुते मुही खाजु होआ मुरदारु ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४२

गुरु नानक - सबद ८०६

रंना होईआ बोधीआ पुरस होए सईआद ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४३

गुरु नानक - सबद ८०७

लख सिउ प्रीति होवै लख जीवणु किआ खुसीआ किआ चाउ ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४३

गुरु नानक - सबद ८०८

कापड़ु काठु रंगाइआ राँगि ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४३

गुरु नानक - सबद ८०९

बेदु पुकारे पुँनु पापु सुरग नरक का बीउ ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४३

गुरु नानक - सबद ८१०

मरण न मूरत पुछिआ पुछी थिति न वार ॥

राग सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४४

गुरु नानक - सबद ८११

नानक ढेरी ढहि पई मिटी संदा कोटु ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४४

गुरु नानक - सबद ८१२

धनवंता इव ही कहै अवरी धन कउ जाउ ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४४

गुरु नानक - सबद ८१३

सूरजु चड़ै विजोगि सभसै घटै आरजा ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४४

गुरु नानक - सबद ८१४

धृगु तिना का जीविआ जि लिखि लिखि वेचहि नाउ ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४५

गुरु नानक - सबद ८१५

सचु वरतु संतोखु तीरथु गिआनु धिआनु इसनानु ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४५

गुरु नानक - सबद ८१६

गिआन विहूणा गावै गीत ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४५

गुरु नानक - सबद ८१७

मनहु जि अंधे कूप कहिआ बिरदु न जाणन्नी ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४६

गुरु नानक - सबद ८१८

गुरमुखि सभ पवितु है धनु संपै माइआ ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२४६

गुरु नानक - सबद ८१९

खाणा पीणा हसणा सउणा विसरि गइआ है मरणा ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५४

गुरु नानक - सबद ८२०

करउ बिनउ गुर अपने प्रीतम हरि वरु आणि मिलावै ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५४