गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (७०१-७२०)

गुरु नानक - सबद ७०१

साच सील सच संजमी सा पूरी परवार ॥

राग मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०८८

गुरु नानक - सबद ७०२

ससुरै पेईऐ कंत की कंतु अगंमु अथाहु ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०८८

गुरु नानक - सबद ७०३

ना मैला ना धुँधला ना भगवा ना कचु ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०८९

गुरु नानक - सबद ७०४

हुकमि रजाई साखती दरगह सचु कबूलु ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९०

गुरु नानक - सबद ७०५

अलगउ जोइ मधूकड़उ सारंगपाणि सबाइ ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९०

गुरु नानक - सबद ७०६

सरबे जोइ अगछमी दूखु घनेरो आथि ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९०

गुरु नानक - सबद ७०७

पूँजी साचउ नामु तू अखुटउ दरबु अपारु ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९०

गुरु नानक - सबद ७०८

पूरब प्रीति पिराणि लै मोटउ ठाकुरु माणि ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९०

गुरु नानक - सबद ७०९

भोलतणि भै मनि वसै हेकै पाधर हीडु ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९०

गुरु नानक - सबद ७१०

माँदलु बेदि सि बाजणो घणो धड़ीऐ जोइ ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९१

गुरु नानक - सबद ७११

सागरु गुणी अथाहु किनि हाथाला देखीऐ ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९१

गुरु नानक - सबद ७१२

सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९१

गुरु नानक - सबद ७१३

हउ मुआ मै मारिआ पउणु वहै दरीआउ ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९१

गुरु नानक - सबद ७१४

हउ मै करी ताँ तू नाही तू होवहि हउ नाहि ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९२

गुरु नानक - सबद ७१५

जिनि कीआ तिनि देखिआ आपे जाणै सोइ ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९३

गुरु नानक - सबद ७१६

काइआ नगरु नगर गड़ अंदरि ॥

रागु मारू दखणी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०३३

गुरु नानक - सबद ७१७

आवउ वंञउ डुँमणी किती मित्र करेउ ॥

रागु मारू काफी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९४

गुरु नानक - सबद ७१८

तू सुणि किरत करंमा पुरबि कमाइआ ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०७

गुरु नानक - सबद ७१९

बाबीहा पृउ बोले कोकिल बाणीआ ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०७

गुरु नानक - सबद ७२०

तू सुणि हरि रस भिंने प्रीतम आपणे ॥

रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०७