गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ ३६
गुरु नानक सबद (७०१-७२०)
गुरु नानक - सबद ७०१
साच सील सच संजमी सा पूरी परवार ॥
राग मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०८८
गुरु नानक - सबद ७०२
ससुरै पेईऐ कंत की कंतु अगंमु अथाहु ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०८८
गुरु नानक - सबद ७०३
ना मैला ना धुँधला ना भगवा ना कचु ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०८९
गुरु नानक - सबद ७०४
हुकमि रजाई साखती दरगह सचु कबूलु ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९०
गुरु नानक - सबद ७०५
अलगउ जोइ मधूकड़उ सारंगपाणि सबाइ ॥
गुरु नानक - सबद ७०६
सरबे जोइ अगछमी दूखु घनेरो आथि ॥
गुरु नानक - सबद ७०७
पूँजी साचउ नामु तू अखुटउ दरबु अपारु ॥
गुरु नानक - सबद ७०८
पूरब प्रीति पिराणि लै मोटउ ठाकुरु माणि ॥
गुरु नानक - सबद ७०९
भोलतणि भै मनि वसै हेकै पाधर हीडु ॥
गुरु नानक - सबद ७१०
माँदलु बेदि सि बाजणो घणो धड़ीऐ जोइ ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९१
गुरु नानक - सबद ७११
सागरु गुणी अथाहु किनि हाथाला देखीऐ ॥
गुरु नानक - सबद ७१२
सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि ॥
गुरु नानक - सबद ७१३
हउ मुआ मै मारिआ पउणु वहै दरीआउ ॥
गुरु नानक - सबद ७१४
हउ मै करी ताँ तू नाही तू होवहि हउ नाहि ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९२
गुरु नानक - सबद ७१५
जिनि कीआ तिनि देखिआ आपे जाणै सोइ ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९३
गुरु नानक - सबद ७१६
काइआ नगरु नगर गड़ अंदरि ॥
रागु मारू दखणी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०३३
गुरु नानक - सबद ७१७
आवउ वंञउ डुँमणी किती मित्र करेउ ॥
रागु मारू काफी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०९४
गुरु नानक - सबद ७१८
तू सुणि किरत करंमा पुरबि कमाइआ ॥
रागु तुखारी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११०७
गुरु नानक - सबद ७१९
बाबीहा पृउ बोले कोकिल बाणीआ ॥
गुरु नानक - सबद ७२०
तू सुणि हरि रस भिंने प्रीतम आपणे ॥
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