गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (६४१-६६०)

गुरु नानक - सबद ६४१

लेखु न मिटई हे सखी जो लिखिआ करतारि ॥

रागु रामकली दखणी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३७

गुरु नानक - सबद ६४२

पाधा पड़िआ आखीऐ बिदिआ बिचरै सहजि सुभाइ ॥

रागु रामकली दखणी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३७

गुरु नानक - सबद ६४३

साजन तेरे चरन की होइ रहा सद धूरि ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९८९

गुरु नानक - सबद ६४४

पिछहु राती सदड़ा नामु खसम का लेहि ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९८९

गुरु नानक - सबद ६४५

मिलि मात पिता पिंडु कमाइआ ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९८९

गुरु नानक - सबद ६४६

करणी कागदु मनु मसवाणी बुरा भला दुइ लेख पए ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९०

गुरु नानक - सबद ६४७

बिमल मझारि बससि निरमल जल पदमनि जावल रे ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९०

गुरु नानक - सबद ६४८

पतित पुनीत असंख होहि हरि चरनी मनु लाग ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९०

गुरु नानक - सबद ६४९

सखी सहेली गरबि गहेली ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९०

गुरु नानक - सबद ६५०

मुल खरीदी लाला गोला मेरा नाउ सभागा ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९१

गुरु नानक - सबद ६५१

कोई आखै भूतना को कहै बेताला ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९१

गुरु नानक - सबद ६५२

इहु धनु सरब रहिआ भरपूरि ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९१

गुरु नानक - सबद ६५३

सूर सरु सोसि लै सोम सरु पोखि लै जुगति करि मरतु सु सनबंधु कीजै ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९१

गुरु नानक - सबद ६५४

माइआ मुई न मनु मुआ सरु लहरी मै मतु ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९२

गुरु नानक - सबद ६५५

जोगी जुगति नामु निरमाइलु ता कै मैलु न राती ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९२

गुरु नानक - सबद ६५६

अहिनिसि जागै नीद न सोवै ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९३

गुरु नानक - सबद ६५७

बेद पुराण कथे सुणे हारे मुनी अनेका ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १००८

गुरु नानक - सबद ६५८

बिखु बोहिथा लादिआ दीआ समुँद मंझारि ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १००९

गुरु नानक - सबद ६५९

सबदि मरै ता मारि मरु भागो किसु पहि जाउ ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०१०

गुरु नानक - सबद ६६०

साची कार कमावणी होरि लालच बादि ॥

रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०१०