गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ ३३
गुरु नानक सबद (६४१-६६०)
गुरु नानक - सबद ६४१
लेखु न मिटई हे सखी जो लिखिआ करतारि ॥
रागु रामकली दखणी, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३७
गुरु नानक - सबद ६४२
पाधा पड़िआ आखीऐ बिदिआ बिचरै सहजि सुभाइ ॥
गुरु नानक - सबद ६४३
साजन तेरे चरन की होइ रहा सद धूरि ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९८९
गुरु नानक - सबद ६४४
पिछहु राती सदड़ा नामु खसम का लेहि ॥
गुरु नानक - सबद ६४५
मिलि मात पिता पिंडु कमाइआ ॥
गुरु नानक - सबद ६४६
करणी कागदु मनु मसवाणी बुरा भला दुइ लेख पए ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९०
गुरु नानक - सबद ६४७
बिमल मझारि बससि निरमल जल पदमनि जावल रे ॥
गुरु नानक - सबद ६४८
पतित पुनीत असंख होहि हरि चरनी मनु लाग ॥
गुरु नानक - सबद ६४९
सखी सहेली गरबि गहेली ॥
गुरु नानक - सबद ६५०
मुल खरीदी लाला गोला मेरा नाउ सभागा ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९१
गुरु नानक - सबद ६५१
कोई आखै भूतना को कहै बेताला ॥
गुरु नानक - सबद ६५२
इहु धनु सरब रहिआ भरपूरि ॥
गुरु नानक - सबद ६५३
सूर सरु सोसि लै सोम सरु पोखि लै जुगति करि मरतु सु सनबंधु कीजै ॥
गुरु नानक - सबद ६५४
माइआ मुई न मनु मुआ सरु लहरी मै मतु ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९२
गुरु नानक - सबद ६५५
जोगी जुगति नामु निरमाइलु ता कै मैलु न राती ॥
गुरु नानक - सबद ६५६
अहिनिसि जागै नीद न सोवै ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९९३
गुरु नानक - सबद ६५७
बेद पुराण कथे सुणे हारे मुनी अनेका ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १००८
गुरु नानक - सबद ६५८
बिखु बोहिथा लादिआ दीआ समुँद मंझारि ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १००९
गुरु नानक - सबद ६५९
सबदि मरै ता मारि मरु भागो किसु पहि जाउ ॥
रागु मारू, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १०१०
गुरु नानक - सबद ६६०
साची कार कमावणी होरि लालच बादि ॥
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