गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (८२१-८४०)

गुरु नानक - सबद ८२१

साची सुरति नामि नही तृपते हउमै करत गवाइआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५४

गुरु नानक - सबद ८२२

जिनि धन पिर का सादु न जानिआ सा बिलख बदन कुमलानी ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५५

गुरु नानक - सबद ८२३

पर दारा पर धनु पर लोभा हउमै बिखै बिकार ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५५

गुरु नानक - सबद ८२४

पवणै पाणी जाणै जाति ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५६

गुरु नानक - सबद ८२५

दुखु वेछोड़ा इकु दुखु भूख ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५६

गुरु नानक - सबद ८२६

दुख महुरा मारण हरि नामु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५६

गुरु नानक - सबद ८२७

बागे कापड़ बोलै बैण ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२५७

गुरु नानक - सबद ८२८

चकवी नैन नींद नहि चाहै बिनु पिर नींद न पाई ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७३

गुरु नानक - सबद ८२९

जागतु जागि रहै गुर सेवा बिनु हरि मै को नाही ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७३

गुरु नानक - सबद ८३०

चातृक मीन जल ही ते सुखु पावहि सारिग सबदि सुहाई ॥१॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७४

गुरु नानक - सबद ८३१

अखली ऊंडी जलु भर नालि ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७४

गुरु नानक - सबद ८३२

मरण मुकति गति सार न जानै ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७५

गुरु नानक - सबद ८३३

हेको पाधरु हेकु दरु गुर पउड़ी निज थानु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७९

गुरु नानक - सबद ८३४

आपीन्नै आपु साजि आपु पछाणिआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७९

गुरु नानक - सबद ८३५

नानक सावणि जे वसै चहु ओमाहा होइ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७९

गुरु नानक - सबद ८३६

नानक सावणि जे वसै चहु वेछोड़ा होइ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७९

गुरु नानक - सबद ८३७

तू सचा सचिआरु जिनि सचु वरताइआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७९

गुरु नानक - सबद ८३८

वैदु बुलाइआ वैदगी पकड़ि ढंढोले बाँह ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७९

गुरु नानक - सबद ८३९

ब्रहमा बिसनु महेसु देव उपाइआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२७९

गुरु नानक - सबद ८४०

आपे छिंझ पवाइ मलाखाड़ा रचिआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८०