गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (७६१-७८०)

गुरु नानक - सबद ७६१

आतम महि रामु राम महि आतमु चीनसि गुर बीचारा ॥

रागु भैरउ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११५३

गुरु नानक - सबद ७६२

माहा माह मुमारखी चड़िआ सदा बसंतु ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६८

गुरु नानक - सबद ७६३

रुति आईले सरस बसंत माहि ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६८

गुरु नानक - सबद ७६४

सुइने का चउका कंचन कुआर ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६८

गुरु नानक - सबद ७६५

सगल भवन तेरी माइआ मोह ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६९

गुरु नानक - सबद ७६६

मेरी सखी सहेली सुनहु भाइ ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६९

गुरु नानक - सबद ७६७

आपे कुदरति करे साजि ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११७०

गुरु नानक - सबद ७६८

जगु कऊआ नामु नही चीति ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११८७

गुरु नानक - सबद ७६९

मनु भूलउ भरमसि आइ जाइ ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११८७

गुरु नानक - सबद ७७०

दरसन की पिआस जिसु नर होइ ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११८८

गुरु नानक - सबद ७७१

चंचलु चीतु न पावै पारा ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११८९

गुरु नानक - सबद ७७२

मतु भसम अंधूले गरबि जाहि ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११८९

गुरु नानक - सबद ७७३

दुबिधा दुरमति अधुली कार ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९०

गुरु नानक - सबद ७७४

आपे भवरा फूल बेलि ॥

रागु बसंतु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९०

गुरु नानक - सबद ७७५

साल ग्राम बिप पूजि मनावहु सुकृतु तुलसी माला ॥

रागु बसंतु हिंडोल, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११७०

गुरु नानक - सबद ७७६

साहुरड़ी वथु सभु किछु साझी पेवकड़ै धन वखे ॥

रागु बसंतु हिंडोल, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११७१

गुरु नानक - सबद ७७७

राजा बालकु नगरी काची दुसटा नालि पिआरो ॥

रागु बसंतु हिंडोल, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११७१

गुरु नानक - सबद ७७८

साचा साहु गुरू सुखदाता हरि मेले भुख गवाए ॥

रागु बसंतु हिंडोल, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११७१

गुरु नानक - सबद ७७९

नउ सत चउदह तीनि चारि करि महलति चारि बहाली ॥

रागु बसंतु हिंडोल, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९०

गुरु नानक - सबद ७८०

अपुने ठाकुर की हउ चेरी ॥

रागु सारंग, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९७