गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ २८
गुरु नानक सबद (५४१-५६०)
गुरु नानक - सबद ५४१
अंतरि उतभुजु अवरु न कोई ॥
रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०५
गुरु नानक - सबद ५४२
जिउ आइआ तिउ जावहि बउरे जिउ जनमे तिउ मरणु भइआ ॥
रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०६
गुरु नानक - सबद ५४३
अउहठि हसत मड़ी घरु छाइआ धरणि गगन कल धारी ॥१॥
रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०७
गुरु नानक - सबद ५४४
सिध सभा करि आसणि बैठे संत सभा जैकारो ॥
रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३८
गुरु नानक - सबद ५४५
किआ भवीऐ सचि सूचा होइ ॥
गुरु नानक - सबद ५४६
घटि घटि बैसि निरंतरि रहीऐ चालहि सतिगुर भाए ॥
गुरु नानक - सबद ५४७
जैसे जल महि कमलु निरालमु मुरगाई नै साणे ॥
गुरु नानक - सबद ५४८
सुणि सुआमी अरदासि हमारी पूछउ साचु बीचारो ॥
गुरु नानक - सबद ५४९
हाटी बाटी रहहि निराले रूखि बिरखि उदिआने ॥
गुरु नानक - सबद ५५०
दरसनु भेख करहु जोगिंद्रा मुँद्रा झोली खिंथा ॥
रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९
गुरु नानक - सबद ५५१
अंतरि सबदु निरंतरि मुद्रा हउमै ममता दूरि करी ॥
गुरु नानक - सबद ५५२
ऊंधउ खपरु पंच भू टोपी ॥
राग रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९
गुरु नानक - सबद ५५३
कवनु सु गुपता कवनु सु मुकता ॥
गुरु नानक - सबद ५५४
किउ करि बाधा सरपनि खाधा ॥
गुरु नानक - सबद ५५५
न निरंतरि दीजै बंधु ॥
गुरु नानक - सबद ५५६
किसु कारणि गृहु तजिओ उदासी ॥
गुरु नानक - सबद ५५७
कितु बिधि पुरखा जनमु वटाइआ ॥
गुरु नानक - सबद ५५८
सतिगुर कै जनमे गवनु मिटाइआ ॥
रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४०
गुरु नानक - सबद ५५९
आदि कउ कवनु बीचारु कथीअले सुँन कहा घर वासो ॥
गुरु नानक - सबद ५६०
कहा ते आवै कहा इहु जावै कहा इहु रहै समाई ॥
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