गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (५४१-५६०)

गुरु नानक - सबद ५४१

अंतरि उतभुजु अवरु न कोई ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०५

गुरु नानक - सबद ५४२

जिउ आइआ तिउ जावहि बउरे जिउ जनमे तिउ मरणु भइआ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०६

गुरु नानक - सबद ५४३

अउहठि हसत मड़ी घरु छाइआ धरणि गगन कल धारी ॥१॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९०७

गुरु नानक - सबद ५४४

सिध सभा करि आसणि बैठे संत सभा जैकारो ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३८

गुरु नानक - सबद ५४५

किआ भवीऐ सचि सूचा होइ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३८

गुरु नानक - सबद ५४६

घटि घटि बैसि निरंतरि रहीऐ चालहि सतिगुर भाए ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३८

गुरु नानक - सबद ५४७

जैसे जल महि कमलु निरालमु मुरगाई नै साणे ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३८

गुरु नानक - सबद ५४८

सुणि सुआमी अरदासि हमारी पूछउ साचु बीचारो ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३८

गुरु नानक - सबद ५४९

हाटी बाटी रहहि निराले रूखि बिरखि उदिआने ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३८

गुरु नानक - सबद ५५०

दरसनु भेख करहु जोगिंद्रा मुँद्रा झोली खिंथा ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद ५५१

अंतरि सबदु निरंतरि मुद्रा हउमै ममता दूरि करी ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद ५५२

ऊंधउ खपरु पंच भू टोपी ॥

राग रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद ५५३

कवनु सु गुपता कवनु सु मुकता ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद ५५४

किउ करि बाधा सरपनि खाधा ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद ५५५

न निरंतरि दीजै बंधु ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद ५५६

किसु कारणि गृहु तजिओ उदासी ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद ५५७

कितु बिधि पुरखा जनमु वटाइआ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद ५५८

सतिगुर कै जनमे गवनु मिटाइआ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४०

गुरु नानक - सबद ५५९

आदि कउ कवनु बीचारु कथीअले सुँन कहा घर वासो ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४०

गुरु नानक - सबद ५६०

कहा ते आवै कहा इहु जावै कहा इहु रहै समाई ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४०