गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (८६१-८८०)

गुरु नानक - सबद ८६१

सरमु धरमु दुइ नानका जे धनु पलै पाइ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८७

गुरु नानक - सबद ८६२

दुखी दुनी सहेड़ीऐ जाइ त लगहि दुख ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८७

गुरु नानक - सबद ८६३

अंधी कंमी अंधु मनु मनि अंधै तनु अंधु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८७

गुरु नानक - सबद ८६४

लख मण सुइना लख मण रुपा लख साहा सिरि साह ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८७

गुरु नानक - सबद ८६५

इकना गलीं जंजीर बंदि रबाणीऐ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८७

गुरु नानक - सबद ८६६

हरणाँ बाजाँ तै सिकदाराँ एन्ना पड़ि्आ नाउ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८८

गुरु नानक - सबद ८६७

आपि उपाए मेदनी आपे करदा सार ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८८

गुरु नानक - सबद ८६८

रूपै कामै दोसती भुखै सादै गंढु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८८

गुरु नानक - सबद ८६९

राजु मालु रूपु जाति जोबनु पंजे ठग ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८८

गुरु नानक - सबद ८७०

पड़िआ लेखेदारु लेखा मंगीऐ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८८

गुरु नानक - सबद ८७१

पउणै पाणी अगनी जीउ तिन किआ खुसीआ किआ पीड़ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८९

गुरु नानक - सबद ८७२

अजरु जरै त नउ कुल बंधु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८९

गुरु नानक - सबद ८७३

पड़्ड़ीऐ नामु सालाह होरि बुधीं मिथिआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८९

गुरु नानक - सबद ८७४

पहिलाँ मासहु निंमिआ मासै अंदरि वासु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८९

गुरु नानक - सबद ८७५

मासु मासु करि मूरखु झगड़े गिआनु धिआनु नही जाणै ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८९

गुरु नानक - सबद ८७६

हउ किआ आखा इक जीभ तेरा अंतु न किन ही पाइआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९०

गुरु नानक - सबद ८७७

नानक माइआ करम बिरखु फल अंमृत फल विसु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९०

गुरु नानक - सबद ८७८

सिरि सिरि होइ निबेड़ु हुकमि चलाइआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९०

गुरु नानक - सबद ८७९

घर महि घरु देखाइ देइ सो सतिगुरु पुरखु सुजाणु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९१

गुरु नानक - सबद ८८०

चिलिमिलि बिसीआर दुनीआ फानी ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२९१