गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (८४१-८६०)

गुरु नानक - सबद ८४१

दोवै तरफा उपाइ इकु वरतिआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८०

गुरु नानक - सबद ८४२

सो हरि सदा सरेवीऐ जिसु करत न लागै वार ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८०

गुरु नानक - सबद ८४३

हरि जीउ सचा सचु तू सचे लैहि मिलाइ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८१

गुरु नानक - सबद ८४४

अतुलु किउ तोलीऐ विणु तोले पाइआ न जाइ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८२

गुरु नानक - सबद ८४५

नाथ जती सिध पीर किनै अंतु न पाइआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८२

गुरु नानक - सबद ८४६

आपि कराए करे आपि हउ कै सिउ करी पुकार ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८२

गुरु नानक - सबद ८४७

सचा वेपरवाहु इको तू धणी ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८३

गुरु नानक - सबद ८४८

खंड पताल असंख मै गणत न होई ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८३

गुरु नानक - सबद ८४९

आपे जगतु उपाइ कै गुण अउगण करे बीचारु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८४

गुरु नानक - सबद ८५०

सचा सतिगुरु सेवि सचु सम्मालिआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८४

गुरु नानक - सबद ८५१

इकि वण खंडि बैसहि जाइ सदु न देवही ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८४

गुरु नानक - सबद ८५२

इकि जैनी उझड़ पाइ धुरहु खुआइआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८५

गुरु नानक - सबद ८५३

सचा अलख अभेउ हठि न पतीजई ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८५

गुरु नानक - सबद ८५४

पूरा सतिगुरु सेवि पूरा पाइआ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८६

गुरु नानक - सबद ८५५

कुलहाँ देंदे बावले लैंदे वडे निलज ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८६

गुरु नानक - सबद ८५६

सउ मणु हसती घिउ गुड़ु खावै पंजि सै दाणा खाइ ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८६

गुरु नानक - सबद ८५७

अगम अगोचरु तू धणी सचा अलख अपारु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८६

गुरु नानक - सबद ८५८

राती कालु घटै दिनि कालु ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८७

गुरु नानक - सबद ८५९

मुआ पिआरु प्रीति मुई मुआ वैरु वादी ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८७

गुरु नानक - सबद ८६०

अंमृत नामु सदा सुखदाता अंते होइ सखाई ॥

रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८७