गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ ४३
गुरु नानक सबद (८४१-८६०)
गुरु नानक - सबद ८४१
दोवै तरफा उपाइ इकु वरतिआ ॥
रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८०
गुरु नानक - सबद ८४२
सो हरि सदा सरेवीऐ जिसु करत न लागै वार ॥
गुरु नानक - सबद ८४३
हरि जीउ सचा सचु तू सचे लैहि मिलाइ ॥
रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८१
गुरु नानक - सबद ८४४
अतुलु किउ तोलीऐ विणु तोले पाइआ न जाइ ॥
रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८२
गुरु नानक - सबद ८४५
नाथ जती सिध पीर किनै अंतु न पाइआ ॥
गुरु नानक - सबद ८४६
आपि कराए करे आपि हउ कै सिउ करी पुकार ॥
गुरु नानक - सबद ८४७
सचा वेपरवाहु इको तू धणी ॥
रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८३
गुरु नानक - सबद ८४८
खंड पताल असंख मै गणत न होई ॥
गुरु नानक - सबद ८४९
आपे जगतु उपाइ कै गुण अउगण करे बीचारु ॥
रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८४
गुरु नानक - सबद ८५०
सचा सतिगुरु सेवि सचु सम्मालिआ ॥
गुरु नानक - सबद ८५१
इकि वण खंडि बैसहि जाइ सदु न देवही ॥
गुरु नानक - सबद ८५२
इकि जैनी उझड़ पाइ धुरहु खुआइआ ॥
रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८५
गुरु नानक - सबद ८५३
सचा अलख अभेउ हठि न पतीजई ॥
गुरु नानक - सबद ८५४
पूरा सतिगुरु सेवि पूरा पाइआ ॥
रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८६
गुरु नानक - सबद ८५५
कुलहाँ देंदे बावले लैंदे वडे निलज ॥
गुरु नानक - सबद ८५६
सउ मणु हसती घिउ गुड़ु खावै पंजि सै दाणा खाइ ॥
गुरु नानक - सबद ८५७
अगम अगोचरु तू धणी सचा अलख अपारु ॥
गुरु नानक - सबद ८५८
राती कालु घटै दिनि कालु ॥
रागु मलार, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १२८७
गुरु नानक - सबद ८५९
मुआ पिआरु प्रीति मुई मुआ वैरु वादी ॥
गुरु नानक - सबद ८६०
अंमृत नामु सदा सुखदाता अंते होइ सखाई ॥
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