गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (३२१-३४०)

गुरु नानक – सबद ३२१

सचे तेरे खंड सचे ब्रहमंड ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६३

गुरु नानक – सबद ३२२

वडी वडिआई जा वडा नाउ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६३

गुरु नानक – सबद ३२३

नानक जीअ उपाइ कै लिखि नावै धरमु बहालिआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६३

गुरु नानक – सबद ३२४

विसमादु नाद विसमादु वेद ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६३

गुरु नानक – सबद ३२५

कुदरति दिसै कुदरति सुणीऐ कुदरति भउ सुख सारु ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६४

गुरु नानक – सबद ३२६

आपीन्नै भोग भोगि कै होइ भसमड़ि भउरु सिधाइआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६४

गुरु नानक – सबद ३२७

भै विचि पवणु वहै सदवाउ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६४

गुरु नानक – सबद ३२८

नानक निरभउ निरंकारु होरि केते राम रवाल ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६४

गुरु नानक – सबद ३२९

नदरि करहि जे आपणी ता नदरी सतिगुरु पाइआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६५

गुरु नानक – सबद ३३०

घड़ीआ सभे गोपीआ पहर कंन्न गोपाल ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६५

गुरु नानक – सबद ३३१

वाइनि चेले नचनि गुर ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६५

गुरु नानक – सबद ३३२

नाउ तेरा निरंकारु है नाइ लइऐ नरकि न जाईऐ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६५

गुरु नानक – सबद ३३३

मुसलमाना सिफति सरीअति पड़ि पड़ि करहि बीचारु ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६५

गुरु नानक – सबद ३३४

मिटी मुसलमान की पेड़ै पई कुमि्आर ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६६

गुरु नानक – सबद ३३५

बिनु सतिगुर किनै न पाइओ बिनु सतिगुर किनै न पाइआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६६

गुरु नानक – सबद ३३६

हउ विचि आइआ हउ विचि गइआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६६

गुरु नानक – सबद ३३७

सेव कीती संतोखीईं जिन्नी सचो सचु धिआइआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६६

गुरु नानक – सबद ३३८

पुरखाँ बिरखाँ तीरथाँ तटाँ मेघाँ खेताँह ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६७

गुरु नानक – सबद ३३९

लख नेकीआ चंगिआईआ लख पुँना परवाणु ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६७

गुरु नानक – सबद ३४०

सचा साहिबु एकु तूँ जिनि सचो सचु वरताइआ ॥

रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६७