गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (५६१-५८०)

गुरु नानक - सबद ५६१

आदि कउ बिसमादु बीचारु कथीअले सुँन निरंतरि वासु लीआ ॥

राग रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४०

गुरु नानक - सबद ५६२

अविगतो निरमाइलु उपजे निरगुण ते सरगुणु थीआ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४०

गुरु नानक - सबद ५६३

साचौ उपजै साचि समावै साचे सूचे एक मइआ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४०

गुरु नानक - सबद ५६४

मनमुखि भूलै जम की काणि ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४१

गुरु नानक - सबद ५६५

गुरमुखि साचे का भउ पावै ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४१

गुरु नानक - सबद ५६६

गुरमुखि परचै बेद बीचारी ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४१

गुरु नानक - सबद ५६७

गुरमुखि अकथु कथै बीचारि ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४१

गुरु नानक - सबद ५६८

गुरमुखि धरती साचै साजी ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४१

गुरु नानक - सबद ५६९

गुरमुखि असट सिधी सभि बुधी ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४१

गुरु नानक - सबद ५७०

नामे राते हउमै जाइ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४१

गुरु नानक - सबद ५७१

नामि रते सिध गोसटि होइ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४१

गुरु नानक - सबद ५७२

पूरे गुर ते नामु पाइआ जाइ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४१

गुरु नानक - सबद ५७३

गुरमुखि रतनु लहै लिव लाइ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४२

गुरु नानक - सबद ५७४

गुरमुखि नामु दानु इसनानु ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४२

गुरु नानक - सबद ५७५

गुरमुखि सासत्र सिमृति बेद ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४२

गुरु नानक - सबद ५७६

बिनु गुर भरमै आवै जाइ ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४२

गुरु नानक - सबद ५७७

जिसु गुरु मिलै तिसु पारि उतारै ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४२

गुरु नानक - सबद ५७८

गुरमुखि बाँधिओ सेतु बिधातै ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४२

गुरु नानक - सबद ५७९

गुरमुखि नामु निरंजन पाए ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९४२

गुरु नानक - सबद ५८०

कवण मूलु कवण मति वेला ॥

रागु रामकली, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब,, ९४२