गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (१२१-१४०)

गुरु नानक - सबद १२१

वसत्र पखालि पखाले काइआ आपे संजमि होवै ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद १२२

काइआ हंसि संजोगु मेलि मिलाइआ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ९३९

गुरु नानक - सबद १२३

कूड़ु बोलि मुरदारु खाइ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १३९

गुरु नानक - सबद १२४

इकि कंद मूलु चुणि खाहि वण खंडि वासा ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४०

गुरु नानक - सबद १२५

जे रतु लगै कपड़ै जामा होइ पलीतु ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४०

गुरु नानक - सबद १२६

जा हउ नाही ता किआ आखा किहु नाही किआ होवा ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४०

गुरु नानक - सबद १२७

माहा रुती सभ तूँ घड़ी मूरत वीचारा ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४०

गुरु नानक - सबद १२८

मिहर मसीति सिदकु मुसला हकु हलालु कुराणु ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४०

गुरु नानक - सबद १२९

हकु पराइआ नानका उसु सूअर उसु गाइ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१

गुरु नानक - सबद १३०

पंजि निवाजा वखत पंजि पंजा पंजे नाउ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१

गुरु नानक - सबद १३१

इकि रतन पदारथ वणजदे इकि कचै दे वापारा ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१

गुरु नानक - सबद १३२

मुसलमाणु कहावणु मुसकलु जा होइ ता मुसलमाणु कहावै ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१

गुरु नानक - सबद १३३

राजे रयति सिकदार कोइ न रहसीओ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१

गुरु नानक - सबद १३४

नदीआ होवहि धेणवा सुँम होवहि दुधु घीउ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४१

गुरु नानक - सबद १३५

भार अठारह मेवा होवै गरुड़ा होइ सुआउ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२

गुरु नानक - सबद १३६

जे देहै दुखु लाईऐ पाप गरह दुइ राहु ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२

गुरु नानक - सबद १३७

अगी पाला कपड़ु होवै खाणा होवै वाउ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२

गुरु नानक - सबद १३८

बदफैली गैबाना खसमु न जाणई ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२

गुरु नानक - सबद १३९

सो जीविआ जिसु मनि वसिआ सोइ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२

गुरु नानक - सबद १४०

किआ खाधै किआ पैधै होइ ॥

रागु माझ, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४२