गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
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गुरु नानक सबद (४१-६०)
गुरु नानक – सबद ४१
पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु ॥
जपु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ८
गुरु नानक – सबद ४२
मोती त मंदर ऊसरहि रतनी त होहि जड़ाउ ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १४
गुरु नानक – सबद ४३
कोटि कोटी मेरी आरजा पवण पीअण अपिआउ ॥
गुरु नानक – सबद ४४
लेखै बोलणु बोलणा लेखै खाणा खाउ ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १५
गुरु नानक – सबद ४५
लबु कुता कूड़ु चूहड़ा ठगि खाधा मुरदारु ॥
गुरु नानक – सबद ४६
अमलु गलोला कूड़ का दिता देवणहारि ॥
गुरु नानक – सबद ४७
जालि मोहु घसि मसु करि मति कागदु करि सारु ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १६
गुरु नानक – सबद ४८
सभि रस मिठे मंनिऐ सुणिऐ सालोणे ॥
गुरु नानक – सबद ४९
कुंगू की कांइआ रतना की ललिता अगर वास तन सास ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १७
गुरु नानक – सबद ५०
गुणवंती गुण वीथरै अउगुणवंती झूरि ॥
गुरु नानक – सबद ५१
आवहु भैणे गलि मिलह अंकि सहेलड़ीआह ॥
गुरु नानक – सबद ५२
भली सरी जि उबरी हउमै मुई घराहु ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १८
गुरु नानक – सबद ५३
धातु मिलै फुनि धातु कउ सिफती सिफति समाइ ॥
गुरु नानक – सबद ५४
ध्रिगु जीवणु दोहागणी मुठी दूजै भाइ ॥
गुरु नानक – सबद ५५
सुंञी देह डरावणी जा जीउ विचहु जाइ ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, १९
गुरु नानक – सबद ५६
तनु जलि बलि माटी भइआ मनु माइआ मोहि मनूरु ॥
गुरु नानक – सबद ५७
नानक बेड़ी सच की तरीऐ गुर वीचारि ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २०
गुरु नानक – सबद ५८
सुणि मन मित्र पिआरिआ मिलु वेला है एह ॥
गुरु नानक – सबद ५९
मरणै की चिंता नही जीवण की नही आस ॥
रागु सिरिरागु, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, २१
गुरु नानक – सबद ६०
एहु मनो मूरखु लोभीआ लोभे लगा लुभानु ॥
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पृष्ठ ३९: सबद (७६१-७८०)
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पृष्ठ ४४: सबद (८६१-८८०)
पृष्ठ ४५: सबद (८८०-९००)
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