गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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गुरु नानक सबद (४६१-४८०)

गुरु नानक - सबद ४६१

जिन कउ भाँडै भाउ तिना सवारसी ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२९

गुरु नानक - सबद ४६२

भाँडा हछा सोइ जो तिसु भावसी ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७३०

गुरु नानक - सबद ४६३

जोगी होवै जोगवै भोगी होवै खाइ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७३०

गुरु नानक - सबद ४६४

जोगु न खिंथा जोगु न डंडै जोगु न भसम चड़ाईऐ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७३०

गुरु नानक - सबद ४६५

कउण तराजी कवणु तुला तेरा कवणु सराफु बुलावा ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७३०

गुरु नानक - सबद ४६६

सभि अवगण मै गुणु नही कोई ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब ७५०

गुरु नानक - सबद ४६७

कचा रंगु कसुँभ का थोड़ड़िआ दिन चारि जीउ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७५१

गुरु नानक - सबद ४६८

माणस जनमु दुलंभु गुरमुखि पाइआ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७५१

गुरु नानक - सबद ४६९

जिउ आरणि लोहा पाइ भंनि घड़ाईऐ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७५२

गुरु नानक - सबद ४७०

मनहु न नामु विसारि अहिनिसि धिआईऐ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७५२

गुरु नानक - सबद ४७१

मंञु कुचजी अंमावणि डोसड़े हउ किउ सहु रावणि जाउ जीउ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६२

गुरु नानक - सबद ४७२

जा तू ता मै सभु को तू साहिबु मेरी रासि जीउ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६२

गुरु नानक - सबद ४७३

भरि जोबनि मै मत पेईअड़ै घरि पाहुणी बलि राम जीउ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६३

गुरु नानक - सबद ४७४

बाबा मै वरु देहि मै हरि वरु भावै तिस की बलि राम जीउ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६३

गुरु नानक - सबद ४७५

बाबा लगनु गणाइ हं भी वंञा साहुरै बलि राम जीउ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६३

गुरु नानक - सबद ४७६

बाबुलि दितड़ी दूरि ना आवै घरि पेईऐ बलि राम जीउ ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६४

गुरु नानक - सबद ४७७

हम घरि साजन आए ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६४

गुरु नानक - सबद ४७८

आवहु सजणा हउ देखा दरसनु तेरा राम ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६४

गुरु नानक - सबद ४७९

आवहु सजणा हउ देखा दरसनु तेरा राम ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६५

गुरु नानक - सबद ४८०

आवहु सजणा हउ देखा दरसनु तेरा राम ॥

रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६५