गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ २४
गुरु नानक सबद (४६१-४८०)
गुरु नानक - सबद ४६१
जिन कउ भाँडै भाउ तिना सवारसी ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७२९
गुरु नानक - सबद ४६२
भाँडा हछा सोइ जो तिसु भावसी ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७३०
गुरु नानक - सबद ४६३
जोगी होवै जोगवै भोगी होवै खाइ ॥
गुरु नानक - सबद ४६४
जोगु न खिंथा जोगु न डंडै जोगु न भसम चड़ाईऐ ॥
गुरु नानक - सबद ४६५
कउण तराजी कवणु तुला तेरा कवणु सराफु बुलावा ॥
गुरु नानक - सबद ४६६
सभि अवगण मै गुणु नही कोई ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब ७५०
गुरु नानक - सबद ४६७
कचा रंगु कसुँभ का थोड़ड़िआ दिन चारि जीउ ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७५१
गुरु नानक - सबद ४६८
माणस जनमु दुलंभु गुरमुखि पाइआ ॥
गुरु नानक - सबद ४६९
जिउ आरणि लोहा पाइ भंनि घड़ाईऐ ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७५२
गुरु नानक - सबद ४७०
मनहु न नामु विसारि अहिनिसि धिआईऐ ॥
गुरु नानक - सबद ४७१
मंञु कुचजी अंमावणि डोसड़े हउ किउ सहु रावणि जाउ जीउ ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६२
गुरु नानक - सबद ४७२
जा तू ता मै सभु को तू साहिबु मेरी रासि जीउ ॥
गुरु नानक - सबद ४७३
भरि जोबनि मै मत पेईअड़ै घरि पाहुणी बलि राम जीउ ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६३
गुरु नानक - सबद ४७४
बाबा मै वरु देहि मै हरि वरु भावै तिस की बलि राम जीउ ॥
गुरु नानक - सबद ४७५
बाबा लगनु गणाइ हं भी वंञा साहुरै बलि राम जीउ ॥
गुरु नानक - सबद ४७६
बाबुलि दितड़ी दूरि ना आवै घरि पेईऐ बलि राम जीउ ॥
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६४
गुरु नानक - सबद ४७७
हम घरि साजन आए ॥
गुरु नानक - सबद ४७८
आवहु सजणा हउ देखा दरसनु तेरा राम ॥
गुरु नानक - सबद ४७९
रागु सूही, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ७६५
गुरु नानक - सबद ४८०
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