गुरु नानक की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ
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दार्शनिक गुरुओं के सबदों के रूपक संदेश
पृष्ठ १८
गुरु नानक सबद (३४१-३६०)
गुरु नानक – सबद ३४१
पड़ि पड़ि गडी लदीअहि पड़ि पड़ि भरीअहि साथ ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६७
गुरु नानक – सबद ३४२
लिखि लिखि पड़िआ ॥
गुरु नानक – सबद ३४३
भगत तेरै मनि भावदे दरि सोहनि कीरति गावदे ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६८
गुरु नानक – सबद ३४४
कूड़ु राजा कूड़ु परजा कूड़ु सभु संसारु ॥
गुरु नानक – सबद ३४५
सचु ता परु जाणीऐ जा रिदै सचा होइ ॥
गुरु नानक – सबद ३४६
दानु महिंडा तली खाकु जे मिलै त मसतकि लाईऐ ॥
गुरु नानक – सबद ३४७
सचि कालु कूड़ु वरतिआ कलि कालख बेताल ॥
गुरु नानक – सबद ३४८
लबु पापु दुइ राजा महता कूड़ु होआ सिकदारु ॥
गुरु नानक – सबद ३४९
वदी सु वजगि नानका सचा वेखै सोइ ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४६९
गुरु नानक – सबद ३५०
धुरि करमु जिना कउ तुधु पाइआ ता तिनी खसमु धिआइआ ॥
गुरु नानक – सबद ३५१
दुखु दारू सुखु रोगु भइआ जा सुखु तामि न होई ॥
गुरु नानक – सबद ३५२
कुँभे बधा जलु रहै जल बिनु कुँभु न होइ ॥
गुरु नानक – सबद ३५३
पड़िआ होवै गुनहगारु ता ओमी साधु न मारीऐ ॥
गुरु नानक – सबद ३५४
नानक मेरु सरीर का इकु रथु इकु रथवाहु ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७०
गुरु नानक – सबद ३५५
साम कहै सेतंबरु सुआमी सच महि आछै साचि रहे ॥
गुरु नानक – सबद ३५६
सतिगुर विटहु वारिआ जितु मिलिऐ खसमु समालिआ ॥
गुरु नानक – सबद ३५७
सिंमल रुखु सराइरा अति दीरघ अति मुचु ॥
गुरु नानक – सबद ३५८
पड़ि पुसतक संधिआ बादं ॥
गुरु नानक – सबद ३५९
कपड़ु रूपु सुहावणा छडि दुनीआ अंदरि जावणा ॥
गुरु नानक – सबद ३६०
दइआ कपाह संतोखु सूतु जतु गंढी सतु वटु ॥
रागु आसा, गुरु नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, ४७१
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