शेख़ फ़रीद की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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शेख़ फ़रीद सबद (੧२੧ - ੧३१)

शेख़ फ़रीद – सबद १२१

तनु तपै तनूर जिउ बालणु हड बलंन्हि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १२२

तनु न तपाइ तनूर जिउ बालणु हड न बालि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १२३

हउ ढूढेदी सजणा सजणु मैडे नालि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १२४

हंसा देखि तरंदिआ बगा आइआ चाउ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १२५

मै जाणिआ वड हंसु है तां मै कीता संगु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १२६

किआ हंसु किआ बगुला जा कउ नदरि धरे ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १२७

सरवर पंखी हेकड़ो फाहीवाल पचास ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १२८

कवणु सु अखरु कवणु गुणु कवणु सु मणीआ मंतु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १२९

निवणु सु अखरु खवणु गुणु जिहबा मणीआ मंतु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १३०

मति होदी होइ इआणा ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १३१

इकु फिका न गालाइ सभना मै सचा धणी ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४

शेख़ फ़रीद – सबद १३२

सभना मन माणिक ठाहणु मूलि मचांगवा ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८४