शेख़ फ़रीद की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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शेख़ फ़रीद सबद (੬੧ - ੮੦)

शेख़ फ़रीद – सबद ६१

फरीदा मंडप मालु न लाइ मरग सताणी चिति धरि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ६२

फरीदा जिन्ही कमी नाहि गुण ते कमड़े विसारि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ६३

फरीदा साहिब दी करि चाकरी दिल दी लाहि भरांदि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ६४

फरीदा काले मैडे कपड़े काला मैडा वेसु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ६५

तती तोइ न पलवै जे जलि टुबी देइ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ६६

जां कुआरी ता चाउ वीवाही तां मामले ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ६७

कलर केरी छपड़ी आइ उलथे हंझ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ६८

हंसु उडरि कोध्रै पइआ लोकु विडारणि जाइ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ६९

चलि चलि गईआं पंखीआं जिन्ही वसाए तल ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ७०

फरीदा इट सिराणे भुइ सवणु कीड़ा लड़िओ मासि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ७१

फरीदा भंनी घड़ी सवंनवी टुटी नागर लजु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ७२

फरीदा भंनी घड़ी सवंनवी टूटी नागर लजु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ७३

फरीदा बे निवाजा कुतिआ एह न भली रीति ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद

उठु फरीदा उजू साजि सुबह निवाज गुजारि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ७५

जो सिरु साई ना निवै सो सिरु कीजै कांइ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ७६

फरीदा किथै तैडे मापिआ जिन्ही तू जणिओहि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ७७

फरीदा मनु मैदानु करि टोए टिबे लाहि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ७८

फरीदा खालकु खलक महि खलक वसै रब माहि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ७९

फरीदा जि दिहि नाला कपिआ जे गलु कपहि चुख ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१

शेख़ फ़रीद – सबद ८०

चबण चलण रतंन से सुणीअर बहि गए ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८१