शेख़ फ़रीद की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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शेख़ फ़रीद सबद (८੧ - ੧੦੦)

शेख़ फ़रीद – सबद ८१

फरीदा बुरे दा भला करि गुसा मनि न हढाइ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ८२

फरीदा पंख पराहुणी दुनी सुहावा बागु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ८३

फरीदा राति कथूरी वंडीऐ सुतिआ मिलै न भाउ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ८४

फरीदा मै जानिआ दुखु मुझ कू दुखु सबाइऐ जगि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ८५

फरीदा भूमि रंगावली मंझि विसूला बाग ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ८६

फरीदा उमर सुहावड़ी संगि सुवंनड़ी देह ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ८७

कंधी वहण न ढाहि तउ भी लेखा देवणा ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ८८

फरीदा डुखा सेती दिहु गइआ सूलां सेती राति ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ८९

लमी लमी नदी वहै कंधी केरै हेति ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९०

फरीदा गलीं सु सजण वीह इकु ढूंढेदी न लहां ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९१

फरीदा इहु तनु भउकणा नित नित दुखीऐ कउणु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९२

फरीदा रब खजूरी पकीआं माखिअ नई वहंन्हि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९३

फरीदा तनु सुका पिंजरु थीआ तलीआं खूंडहि काग ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९४

कागा करंग ढंढोलिआ सगला खाइआ मासु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९५

कागा चूंडि न पिंजरा बसै त उडरि जाहि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९६

फरीदा गोर निमाणी सडु करे निघरिआ घरि आउ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९७

एनी लोइणी देखदिआ केती चलि गई ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९८

आपु सवारहि मै मिलहि मै मिलिआ सुखु होइ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद ९९

कंधी उतै रुखड़ा किचरकु बंनै धीरु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२

शेख़ फ़रीद – सबद १००

फरीदा महल निसखण रहि गए वासा आइआ तलि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८२