शेख़ फ़रीद की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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शेख़ फ़रीद सबद (४१ - ४४)

शेख़ फ़रीद – सबद ४१

फरीदा ए विसु गंदला धरीआं खंडु लिवाड़ि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७९

शेख़ फ़रीद – सबद ४२

फरीदा चारि गवाइआ हंढि कै चारि गवाइआ समि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७९

शेख़ फ़रीद – सबद ४३

फरीदा दरि दरवाजै जाइ कै किउ डिठो घड़ीआलु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७९

शेख़ फ़रीद – सबद ४४

घड़ीए घड़ीए मारीऐ पहरी लहै सजाइ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७९

शेख़ फ़रीद – सबद ४५

बुढा होआ सेख फरीदु क्मबणि लगी देह ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ४६

फरीदा बारि पराइऐ बैसणा सांई मुझै न देहि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ४७

कंधि कुहाड़ा सिरि घड़ा वणि कै सरु लोहारु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ४८

फरीदा इकना आटा अगला इकना नाही लोणु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ४९

पासि दमामे छतु सिरि भेरी सडो रड ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५०

फरीदा कोठे मंडप माड़ीआ उसारेदे भी गए ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५१

फरीदा खिंथड़ि मेखा अगलीआ जिंदु न काई मेख ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५२

फरीदा दुहु दीवी बलंदिआ मलकु बहिठा आइ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५३

फरीदा वेखु कपाहै जि थीआ जि सिरि थीआ तिलाह ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५४

फरीदा कंनि मुसला सूफु गलि दिलि काती गुड़ु वाति ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५५

फरीदा रती रतु न निकलै जे तनु चीरै कोइ ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५६

फरीदा सोई सरवरु ढूढि लहु जिथहु लभी वथु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५७

फरीदा नंढी कंतु न राविओ वडी थी मुईआसु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५८

फरीदा सिरु पलिआ दाड़ी पली मुछां भी पलीआं ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ५९

फरीदा कोठे धुकणु केतड़ा पिर नीदड़ी निवारि ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०

शेख़ फ़रीद – सबद ६०

फरीदा कोठे मंडप माड़ीआ एतु न लाए चितु ॥

सलोक, सेख फरीद, गुरु ग्रंथ साहिब, १३८०