भगत कबीर की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

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भगत कबीर सबद (२०१-२२०)

भगत कबीर – सबद २०१

निरधन आदरु कोई न देइ ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११५९

भगत कबीर – सबद २०२

गुर सेवा ते भगति कमाई ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११५९

भगत कबीर – सबद २०३

सिव की पुरी बसै बुधि सारु ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११५९

भगत कबीर – सबद २०४

सो मुलाँ जो मन सिउ लरै ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११५९

भगत कबीर – सबद २०५

जो पाथर कउ कहते देव ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६०

भगत कबीर – सबद २०६

जल महि मीन माइआ के बेधे ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६०

भगत कबीर – सबद २०७

जब लगु मेरी मेरी करै ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६०

भगत कबीर – सबद २०८

सतरि सैइ सलार है जा के ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६१

भगत कबीर – सबद २०९

सभु कोई चलन कहत है ऊहाँ ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६१

भगत कबीर – सबद २१०

किउ लीजै गढु बंका भाई ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६१

भगत कबीर – सबद २११

गंग गुसाइनि गहिर गंभीर ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६२

भगत कबीर – सबद २१२

अगम द्रुगम गड़ि रचिओ बास ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६२

भगत कबीर – सबद २१३

कोटि सूर जा कै परगास ॥

रागु भैरउ, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११६२

भगत कबीर – सबद २१४

मउली धरती मउलिआ अकासु ॥

रागु बसंतु, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९३

भगत कबीर – सबद २१५

पंडित जन माते पड़ि् पुरान ॥

रागु बसंतु, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९३

भगत कबीर – सबद २१६

जोइ खसमु है जाइआ ॥

रागु बसंतु, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९४

भगत कबीर – सबद २१७

प्रहलाद पठाए पड़न साल ॥

रागु बसंतु, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९४

भगत कबीर – सबद २१८

इसु तन मन मधे मदन चोर ॥

रागु बसंतु, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९४

भगत कबीर – सबद २१९

नाइकु एकु बनजारे पाच ॥

रागु बसंतु, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९४

भगत कबीर – सबद २२०

सुरह की जैसी तेरी चाल ॥

रागु बसंतु, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, ११९६