भगत कबीर की रचनाओं की रूपकात्मक व्याख्याएँ और निर्धारित संगीत-शास्त्र में प्रस्तुतियाँ

सबदों की ऑडियो प्लेलिस्ट निर्धारित संगीत-शास्त्र में सुनें।

पृष्ठ २०

भगत कबीर सबद (३८१-४००)

भगत कबीर – सबद ३८१

कबीर गंग जमुन के अंतरे सहज सुँन के घाट ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७२

भगत कबीर – सबद ३८२

कबीर जैसी उपजी पेड ते जउ तैसी निबहै ओड़ि ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७२

भगत कबीर – सबद ३८३

कबीरा एकु अचंभउ देखिओ हीरा हाट बिकाइ ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७२

भगत कबीर – सबद ३८४

कबीरा जहा गिआनु तह धरमु है जहा झूठु तह पापु ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७२

भगत कबीर – सबद ३८५

कबीर माइआ तजी त किआ भइआ जउ मानु तजिआ नही जाइ ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब १३७२

भगत कबीर – सबद ३८६

कबीर साचा सतिगुरु मै मिलिआ सबदु जु बाहिआ एकु ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७२

भगत कबीर – सबद ३८७

कबीर साचा सतिगुरु किआ करै जउ सिखा महि चूक ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७२

भगत कबीर – सबद ३८८

कबीर है गै बाहन सघन घन छत्रपती की नारि ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७२

भगत कबीर – सबद ३८९

कबीर नृप नारी किउ निंदीऐ किउ हरि चेरी कउ मानु ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९०

कबीर थूनी पाई थिति भई सतिगुर बंधी धीर ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९१

कबीर हरि हीरा जन जउहरी ले कै माँडै हाट ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९२

कबीर काम परे हरि सिमरीऐ ऐसा सिमरहु नित ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९३

कबीर सेवा कउ दुइ भले एकु संतु इकु रामु ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९४

कबीर जिह मारगि पंडित गए पाछै परी बहीर ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९५

कबीर दुनीआ के दोखे मूआ चालत कुल की कानि ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९६

कबीर डूबहिगो रे बापुरे बहु लोगन की कानि ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९७

कबीर भली मधूकरी नाना बिधि को नाजु ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९८

कबीर दावै दाझनु होतु है निरदावै रहै निसंक ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ३९९

कबीर पालि समुहा सरवरु भरा पी न सकै कोई नीरु ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३

भगत कबीर – सबद ४००

कबीर परभाते तारे खिसहि तिउ इहु खिसै सरीरु ॥

सलोक, भगत कबीर, गुरु ग्रंथ साहिब, १३७३